नेपाल में माओवादियों ने नाराजगी के बीच 'पीपुल्स वार' की वर्षगांठ मनाई
काठमांडू, 13 फरवरी (आईएएनएस)। सरकार के खिलाफ हथियार उठाने के 14 वर्ष और एक शांति संधि के जरिए विद्रोह समाप्त होने के चार वर्ष बाद नेपाल के माओवादियों ने सत्ताधारी पार्टियों की नाराजगी और संदेह के बीच बगावत की वर्षगांठ मनाई।
नेपाल के ताकतवार शाही परिवार और सरकार के खिलाफ फरवरी 1996 में विद्रोह का झंडा उठाकर दुनिया की सुर्खियों आए एक किसान के बेटे पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' ने कहा कि वह आशावाद का कोई कारण नहीं देखते।
'पीपुल्स वार' की समाप्ति के लिए वर्ष 2006 में एक शांति संधि पर हस्ताक्षर करने वाले प्रचंड ने पार्टी के दैनिक मुखपत्र 'जनदिशा' में लिखा कि उन्हें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के विघटन के लिए भारत सरकार से निर्देशित कार्रवाई की डर है।
प्रचंड ने कहा कि वर्तमान सरकार के सदस्यों के समर्थन से पीएलए को राष्ट्रीय सेना से बाहर रखने की बड़ी साजिश है और यदि इसे जारी रखा गया तो भारी उथल-पुथल होगी।
माओवादी पीपुल्स वार के कारण नेपाल एक हिंदू राजशाही से धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बना। पीपुल्स वार की वर्षगांठ पर माओवादी पार्टी ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों का नया दौर शुरू करने की भी घोषणा की।
सेना प्रमुख को बर्खास्त करने के विफल प्रयास के कारण अपनी सरकार के गिरने के बाद से माओवादी पार्टी लगातार आंदोलन कर रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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