पाक के साथ परमाणु समझौते की वकालत
वाशिंगटन, 11 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका में दक्षिणा एशियाई सुरक्षा मामलों की एक विशेषज्ञ ने सुझाव दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में सहयोग के लिए अमेरिका को पाकिस्तान के साथ परमाणु समझौता करना चाहिए।
जार्जटाउन विश्वविद्यालय में दक्षिण एशियाई मामलों की सहायक प्रोफेसर क्रिस्टीन फेयर ने कहा, "अरबों डॉलर के अमेरिकी सहयोग राशि के मुकाबले में परमाणु सहयोग से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।"
अमेरिकी समाचार पत्र 'वॉल स्ट्रीट जनरल' में क्रिस्टीन का एक लेख प्रकाशित हुआ है, जिसमें पाकिस्तान के साथ परमाणु समझौते की वकालत की गई है। उन्होंने कहा, "इस्लामाबाद ने अफगान-तालिबान और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई से इंकार कर दिया है। उसने परमाणु वैज्ञानिक ए.क्यू खान को वाशिंगटन को सौंपने से भी इंकार कर दिया।"
क्रिस्टिन का सुझाव है कि ऐसी परिस्थिति में यदि पाकिस्तान के साथ परमाणु समझौता किया जाता है तो सकारात्मक परिणाम निकल सकते हैं। उन्होंने परमाणु समझौते से पहले पाकिस्तान की परमाणु क्षमता और नागरिक सहयोग की बुनियादी मान्यता के लिए सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को परमाणु नेटवर्क के बारे में अमेरिका को पूरा सहयोग करना होगा।
क्रिस्टीन ने कहा कि पाकिस्तान को अपनी सीमा में आतंकवादी गतिविधियों को खत्म करने के लिए आश्वासन देना होगा। उन्होंने इस संबंध में आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का भी उल्लेख किया।
क्रिस्टीन ने कहा कि वैसे पाकिस्तान के साथ परमाणु समझौता करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि यह इस्लामाबाद और वाशिंगटन दोनों के लिए आसान नहीं है।
क्रिस्टीन ने कहा कि यदि पाकिस्तान के साथ परमाणु समझौता होता है तो इस क्षेत्र में अमेरिका अपने हितों के अनुसार काम कर सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और पाकिस्तान के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अच्छे संबंध दोनों मुल्कों के हित में होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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