एनआईडी के छात्र ने राठौर पर किया चाकू से हमला (राउंडअप)

यद्यपि घायल राठौड़ कुछ घंटे बाद ही सुनवाई के लिए वापस लौट आए। राठौर को सुनाई गई सजा के खिलाफ दायर याचिका पर लगातार तीन दिन तक कैमरे के सामने चलने वाली सुनवाई का सोमवार को पहला दिन था।

चंडीगढ़ पुलिस ने हमलावर उत्सव शर्मा (29) को गिरफ्तार कर लिया है। यह युवक वाराणसी का रहने वाला है और अहमदाबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (एनआईडी) से फिल्म निर्माण की पढ़ाई कर रहा है। उत्सव को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 324 के तहत निरुद्ध किया गया है।

राठौड़ सेक्टर 17 स्थित जिला अदालत से बाहर निकलकर अपनी कार की ओर बढ़ रहे थे तभी युवक ने उनकी गर्दन पकड़ ली और उन पर चाकू से तीन बार हमला किया। हमले के समय पत्नी व वकील आभा राठौड़ उसके साथ मौजूद थीं।

राठौर के एक अन्य वकील जयपुर के नारायण दत्त शर्मा भी हमले के दौरान घायल हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हमले के कुछ ही समय बाद राठौड़ दोपहर के भोजन के बाद की सुनवाई के लिए अपने गाल और गले पर पट्टियों के साथ अदालत परिसर में लौट आए। यद्यपि न्यायाधीश ने सुनवाई स्थगित करने का विकल्प रखा था लेकिन राठौड़ ने कहा कि सुनवाई जारी रखी जा सकती है। सुनवाई करीब 30 मिनट तक जारी रही।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एस.एस. श्रीवास्तव ने आईएएनएस को बताया कि हमलावर युवक की मानसिक स्थिति अस्थिर मालूम होती है और वह करीब एक महीने से पंचकूला कस्बे के पास रह रहा था।

श्रीवास्तव ने बाद में संवाददाताओं को बताया, "हमने वाराणसी में रह रहे युवक के परिजनों से बात की है और अहमदाबाद के उस चिकित्सक से भी बात की है, जिसके अधीन उसका मानसिक इलाज चल रहा है।"

श्रीवास्तव ने कहा, "इस घटना के पीछे कोई कारण नहीं समझ में आता है। वह आक्रोशित लगता था और उसके भीतर यह भावना भर आई थी कि रुचिका के साथ न्याय नहीं हुआ और उसने मानसिक असंतुलन की स्थिति में हमले को अंजाम दे दिया।"

उत्सव एक मेधावी छात्र रहा है। उसे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में फाइन आर्ट्स में स्नातक की पढ़ाई के दौरान मेरिट के आधार पर छात्रवृत्ति प्राप्त हुई थी। उसके पिता खुद बीएचयू के मेकैनिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर है और मां मनोरोग विभाग में अध्यापिका हैं।

इस घटना से चकित प्रोफेसर शर्मा ने कहा, "उत्सव कहता था कि वह अन्याय बर्दाश्त नहीं कर सकता और इस तरह के मामलों पर बात करता रहता था। लेकिन चाहे वह मेरा बेटा हो या कोई और किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं है।"

रुचिका की मित्र आराधना के अभिभावकों, आनंद और मधु प्रकाश के वकील पंकज भारद्वाज ने बताया कि न्यायाधीश ने मंगलवार की सुनवाई स्थगित कर दी। अब बुधवार को सुनवाई होगी। गौरतलब है कि आनंद और मधु पिछले 19 वर्षो से रुचिका को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

आनंद ने बाद में पत्रकारों से कहा कि राठौड़ पर हमला गलत था।

आनंद ने कहा कि वे कई सालों से राठौड़ के खिलाफ लड़ रहे हैं। कानून व्यवस्था अपना काम कर रही है और यह हमला न्यायोचित नहीं था।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने रुचिका के साथ 12 अगस्त 1990 को हुए दुर्व्यवहार के मामले में राठौर को गत 21 दिसम्बर को दोषी करार दिया था।

राठौर को छह महीने की कठोर कैद और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। इस सजा के तुरंत बाद ही राठौर को जमानत मिल गई थी।

रुचिका मामले में दोषी ठहराए जाने के खिलाफ राठौड़ की अपील पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में सोमवार से बंद कमरे में सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई के दौरान मीडिया और मुकदमे से ताल्लुक न रखने वाले लोगों को अदालत से बाहर रखा गया।

अदालत दो मामलों में सुनवाई कर रही है। इनमें से एक मामला सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा सजा दिए जाने पर राठौर द्वारा दायर अपील से संबंधित है। दूसरा मामला सीबीआई द्वारा राठौर की सजा छह महीने से बढ़ाकर दो साल के कठोर कारावास में बदलने के लिए की गई अपील से संबंधित है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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