महंगाई के पीछे महाघोटाला : गडकरी (लीड-1)
भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने सोमवार को एक विशेष संवाददाता सम्मेलन में महंगाई के मुद्दे पर संप्रग सरकार पर न सिर्फ निशाना साधा बल्कि उसके ऊपर महाघोटाले का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, "संप्रग सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण आम जनता को महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है। दु:ख की बात यह है कि एक सफल अर्थशास्त्री के प्रधानमंत्री रहते लोगों को दाल-रोटी के लिए मोहताज होना पड़ रहा है। एक सफल अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री देश को महंगाई से उबारने में असफल हुए हैं।"
गडकरी ने कहा कि संप्रग सरकार में महंगाई के नाम पर महाघोटाला हुआ है। उन्होंने एक-एक कर दाल, चीनी, चावल की कीमतों में हुई वृद्धि के पीछे के कारणों का खुलासा किया। उन्होंने इसके लिए किसी एक को जिम्मेदार ठहराने की बजाए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, संप्रग सरकार की आर्थिक नीतियों और मनमोहन मंत्रीमंडल को दोषी बताया।
उन्होंने कहा कि इसके लिए कृषि मंत्री शरद पवार के साथ-साथ प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी भी जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, "पवार अकेले जिम्मेदार नहीं हैं। मैं उनका बचाव नहीं कर रहा हूं। नीतिगत फैसले मंत्रिमंडल की बैठक में लिए जाते हैं। इसलिए प्रधानमंत्री और संप्रग सरकार इसके लिए जिम्मेदार हैं। मेरा मानना है कि कृषि मंत्रालय, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय व वित्त मंत्रालय में समन्वय का अभाव है।"
उन्होंने कहा कि इस सरकार की नीतियां किसानों को मारने और आम आदमी को लूटने वाली हैं। कांग्रेस का नारा है कि कांग्रेस का हाथ आम आदमी के साथ लेकिन अब ऐसा लगता है कि कांग्रेस का हाथ गरीबों का गला पकड़ने के लिए है।
गडकरी ने कहा कि महंगाई बढ़ने से बहुराष्ट्रीय कंपनियों और उद्योग जगत के लोगों को फायदा पहुंचा है। उन्होंने कहा कि इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उत्पाद कंपनियों का वायदा करोबार से वर्ष 2009 में फायदा 500 से 3000 फीसदी तक पहुंच गया है।
इसमें नेताओं की सांठगांठ होने का संकेत देते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा, "बगैर राजनतिक समर्थन के यह संभव ही नहीं है।" उन्होंने इन कंपनियों के नाम उजागर करने से इंकार करते हुए कहा कि बेहतर होता कि प्रधानमंत्री इसका खुलासा करते।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी महंगाई के खिलाफ संसद से सड़क तक प्रदर्शन करेगी। इसके लिए सभी दलों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज इस सिलसिले में सभी राजनीतिक दलों से बात करेंगी और संयुक्त रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि बेहतर होगा कि वामपंथी दल भी इस मसले पर साथ आएं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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