'हमें कृपाण धारण करने का अधिकार है'
लंदन, 8 फरवरी (आईएएनएस)। एशियाई मूल के पहले ब्रिटिश न्यायाधीश ने सोमवार को कहा कि उसे कृपाण धारण करने का अधिकार है। इसके साथ ही न्यायाधीश ने स्कूलों को चेतावनी दी है कि यदि वे सिख छात्रों को कृपाण धारण करने पर प्रतिबंध लगाते हैं तो वे भेदभाव पैदा करने के दोषी होंगे।
भारतीय मूल के केन्या में पैदा हुए सिख समुदाय के सर मोटा सिंह ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है, जब ब्रिटेन में सार्वजनिक स्थानों पर कृपाण धारण करने को लेकर कई विवादास्पद मामले सामने आए हैं।
स्कूलों, नियोक्ताओं और राजनीतिज्ञों द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक पोशाकों और प्रतीकों को धारण करने का विरोध किए जाने पर तमाम सिखों, मुस्लिमों और ईसाइयों में नाराजगी पैदा हो गई है। इन प्रतीकों में क्रॉस, कड़ा, कृपाण, पगड़ी और बुर्का शामिल हैं।
लेकिन मोटा सिंह ने कहा है कि सिखों को कृपाण धारण करने का अधिकार है। वर्ष 1982 में जब वह न्यायाधीश के रूप में पहली बार अदालत में पगड़ी धारण कर पहुंचे थे तो इसे लेकर मीडिया में काफी चर्चा हुई थी।
सिंह ने बीबीसी को बताया है, "यदि कोई सिख युवती या सिख युवक नामकरण के बाद कृपाण धारण करना चाहता है तो मैं इसमें कोई गलती नहीं देखता।"
कृपाण धारण करने के अधिकार का विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब ब्रिटेन में चाकूबाजी की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। वर्ष 2008 के आंकड़े के अनुसार इंग्लैंड और वेल्स में हर सप्ताह चाकूबाजी की 400 घटनाएं घट रही हैं।
सिंह ने कहा है, "मैं समझ सकता हूं कि यह एक चिंता का विषय है। लेकिन मैंने ऐसा कोई मामला नहीं देखा-सुना है, जिसमें कोई सिख किसी को घायल करने के लिए अपने कृपाण का इस्तेमाल किया हो। कृपाण एक रक्षात्मक हथियार है।"
सिंह ने कहा, "मैं कृपाण धारण करता हूं और मैं इसे पिछले 35-40 वर्षो से धारण करते आ रहा हूं, चाहे मैं अदालत में रहा हूं या सरकारी भवनों के दौरे पर गया हूं।"
ज्ञात हो कि इस वर्ष बकिंघम पैलेस में एक समारोह में सिंह को महारानी एलिजाबेथ द्वितीय सम्मानित करने वाली हैं।
सिंह ने कहा है, "सच्चाई यह है कि मेरे लिए एक सिख होना कुछ और होने से ज्यादा मायने रखता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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