मदद की आड़ में बच्चों की तस्करी

हेती में कुछ बच्चों को अवैध तरीक़े से देश से बाहर ले जाने के मामले में 10 अमरीकी मिशनरियों को अभियुक्त बनाया गया है. इन लोगों को पिछले हफ़्ते 33 बच्चों को अवैध रूप से बाहर ले जाते हुए सीमा पर गिरफ़्तार किया गया था. हालांकि इन मिशनरियों का कहना था कि वो भूकंप की वजह से अपंग हो गए बच्चों की मदद करने की कोशिश कर रहे थे.
लेकिन बाद में पता चला कि इन बच्चों के मां- बाप जीवित थे. दो फरवरी को ही तस्करी की कोशिश के इस मामले के सामने आने के बाद 10 अमरीकी नागरिकों को हिरासत में लिया गया था. पर मामले की सुनवाई के स्थान को लेकर अनिर्णय की स्थिति और दुभाषिए की कमी के कारण हेती में मामले की सुनवाई एक दिन के लिए टाल दी गई थी.
हेती में पिछले महीने आए भीषण भूकंप ने दुनियाभर को हिलाकर रख दिया था. लगभग दो लाख मृतकों के आंकड़े वाले इस भूकंप के बाद देश में मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लोग और संस्थाएं पहुँची. इसी दौरान मदद के अलावा बच्चों की तस्करी के इस कथित मामले के सामने आने के बाद हड़कंप मचा हुआ है.
तस्करी का आरोप
कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान किसी भी पत्रकार को अंदर जाने की अनुमति नहीं थी जबकि चर्च के अधिकारियों को न्यायालय परिसर से बाहर कर दिया गया था. पत्रकारों ने वहां मौजूद एक अमरीकी अभियुक्त लॉरा सिल्स्बी से बात करने की कोशिश की. लेकिन उन्होंने सिर्फ़ यही कहा, 'मैं अच्छा महसूस कर रही हूं मुझे भगवान पर भरोसा है."
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अगर इन लोगों पर आरोप साबित हो जाता है तो इन्हें लंबी जेल की सज़ा हो सकती है. अभियुक्त बनाए गए इन पांच महिलाओं और पांच पुरुषों की सुनवाई इस हफ़्ते की शुरुआत में ही होनी थी लेकिन अनुवादकों के अभाव में तारीख़ को आगे बढ़ाना पड़ा. हैती के प्रधानमंत्री जीन मैक्स बेलेराइव ने इन अमरीकियों को अपहरणकर्ता कहा है.












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