भारत-पाकिस्तान ने की वार्ता की तारीखों पर चर्चा (राउंडअप)
पाकिस्तानी उच्चायुक्त शाहिद मलिक ने विदेश सचिव निरूपमा राव से शुक्रवार को मुलाकात की और भारत-पाकिस्तान के विदेश सचिवों के बीच प्रस्तावित बातचीत के लिए तारीखों पर चर्चा की। दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच इसी महीने मुलाकात की संभावना है।
सूत्रों ने कहा है कि पाकिस्तानी विदेश सचिव सलमान बशीर, राव के साथ बातचीत करने के लिए अगले कुछ हफ्तों में नई दिल्ली आ सकते हैं।
पिछले वर्ष सितंबर महीने के बाद दोनों विदेश सचिवों के बीच यह पहली मुलाकात होगी। सितंबर में दोनों विदेश सचिवों की मुलाकात संयुक्त राष्ट्र महासभा के अवसर पर न्यूयार्क में हुई थी।
भारत की ओर से कहा गया है कि वह एक खुले और सकारात्मक दिमाग से बातचीत करेगा और परिणाम का पूर्व आकलन नहीं करेगा।
सूत्रों ने कहा है कि आतंकवाद को रोकने सहित सभी प्रासंगिक मुद्दों पर बातचीत होगी।
पाकिस्तान ने भारत द्वारा वार्ता की पेशकश को सकारात्मक बताते हुए कहा कि वह बातचीत के एजेंडे पर काम कर रहा है लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए आतंकवाद एक अकेला मुद्दा नहीं है।
पाकिस्तानी विदेश विभाग के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने गुरुवार को एक निजी टीवी चैनल को टेलीफोन पर दिए साक्षात्कार में कहा, "कुल मिलाकर यह एक सकारात्मक पहल है और हम इसका स्वागत करते हैं।"
उन्होंने कहा कि भारतीय प्रस्ताव को प्राप्त करने के बाद पाकिस्तान ने बातचीत के एजेंडे पर काम करना शुरू कर दिया है। जल्द ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
बासित ने कहा, "पाकिस्तान भारत के साथ सार्थक और अनवरत रिश्ते तलाश रहा है। दोनों देशों के बीच बातचीत के लिए कई मुद्दे हैं, जिनमें आतंकवाद भी है।"
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच इस समय चर्चा के लिए केवल आतंकवाद ही एकमात्र मुद्दा नहीं है। यदि भारत सरकार ऐसा कहती है तो रिश्तों को दोबारा सुधारने के लिए यह उपयुक्त प्रयास नहीं है।
बासित का यह बयान भारत द्वारा पाकिस्तान को विदेश सचिव स्तर की वार्ता के लिए भेजे गए औपचारिक प्रस्ताव के दूसरे दिन आया है।
नई दिल्ली की तरफ से हालांकि स्पष्ट कहा गया है कि बातचीत मुख्यत: आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई पर ही केंद्रित होगी।
वैश्विक दबाव के कारण बातचीत की मेज पर आया भारत :
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने शुक्रवार को कहा है कि वैश्विक दबाव के कारण भारत बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हुआ है। गिलानी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय अब लंबित कश्मीर विवाद को सुलझाने की जरूरत महसूस करने लगा है।
समाचार एजेंसी ऑनलाइन ने खबर दी है कि गिलानी, कश्मीर एकता दिवस पर पाकिस्तान शासित कश्मीर के कैबिनेट की एक बैठक को संबोधित कर रहे थे।
गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा से चाहता रहा है कि कश्मीर समस्या का समाधान बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से किया जाए। पाकिस्तान यह भी चाहता रहा है कि बातचीत की प्रक्रिया में कश्मीरियों को शामिल किया जाए।
गिलानी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब एक दिन पहले ही नई दिल्ली में पता चला है कि भारत ने विदेश सचिवों के बीच बातचीत के लिए पाकिस्तान को एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा है और संकल्प लिया है कि वह चर्चा को एक खुले और सकारात्मक दिमाग से लेगा।
एक उच्च पदस्थ सूत्र ने नई दिल्ली में गुरुवार को कहा था कि सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि शुरुआती बातचीत आतंकवाद रोकने पर केंद्रित होगी, लेकिन संकेत इस बात का भी दिया गया है कि "दोनों देशों के बीच शांति और स्थिरता का वातावरण तैयार करने में सहयोग करने वाले अन्य मुद्दे भी उठाए जाएंगे।"
सूत्र ने कहा है, "विदेश सचिवों के बीच बातचीत की तारीखों पर चर्चा जारी है।"
पाक के शीर्ष नेताओं की बैठक :
भारत की ओर से विदेश सचिव स्तर की बातचीत के लिए आए प्रस्ताव पर चर्चा के लिए पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं ने यहां बैठक की है। नेताओं ने भारत के इस प्रस्ताव का आमतौर पर स्वागत किया है।
इस बैठक में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी, विदेश सचिव महमूद कुरैशी और सेना प्रमुख जनरल अशफाक परवेज कयानी ने हिस्सा लिया।
जरदारी और कयानी ने पहले अलग-अलग बैठक की और बाद में दोनों ने एक साथ मुलाकात की। जरदारी ने इस अवसर पर रात्रिभोज का भी आयोजन किया, जिसमें कुरैशी भी शामिल हुए।
समाचार पत्र डॉन ने शुक्रवार को खबर दी है कि बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा तथा चरमवाद व आतंकवाद के खिलाफ जारी अभियान पर भी चर्चा हुई। लेकिन यह बैठक महत्वपूर्ण इसलिए रही, क्योंकि यह भारत की ओर से आए बातचीत के प्रस्ताव के बाद आयोजित हुई है।
राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता फरहतुल्ला बाबर ने हालांकि बैठक पर किसी तरह की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है।
डॉन ने लिखा है, "राजनीतिक पर्यवेक्षक इस बैठक को महत्वपूर्ण बताते हैं, क्योंकि भारत की ओर से विदेश सचिव स्तर की बातचीत का औपचारिक रूप से प्रस्ताव आया है। विदेश मंत्री की उपस्थिति इस बात का संकेत करती है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत बहाली का प्रस्ताव चर्चा के दौरान प्रमुखता से उठाया गया है।"
वार्ता की पेशकश को अमेरिका ने सराहा :
अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ आधिकारिक स्तर की वार्ता बहाल करने की भारतीय पेशकश का यह कहकर स्वागत किया है कि क्षेत्र में स्थायित्व कायम करने के लिए भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में वार्ता महत्वपूर्ण पहलू है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता फिलिप जे. क्राउने ने गुरुवार को इस खबर पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "हम भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में वार्ता के हक में है क्योंकि यह क्षेत्र में स्थायित्व कायम करने के लिए जरूरी है।"
भारत की ओर से की गई इस पेशकश पर टिप्पणी करते हुए क्राउनी ने कहा कि वह उक्त खबर से अवगत नहीं है लेकिन यकीनन यह उत्साहजनक कदम है कि भारत और पाकिस्तान तनाव घटाने और सहयोग बढ़ाने के लिए कदम उठाएं। जिसकी बदौलत क्षेत्र में स्थायित्व कायम हो सके।
गुरुवार को भारत ने पाकिस्तान से दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच बातचीत की पेशकश करते हुए मुक्त एवं सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विचार विमर्श की प्रतिबद्धता जाहिर की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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