'कंधमाल दंगा पीड़ितों को और सहायता की जरूरत'

जिला प्रशासन से मुलाकात के बाद प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने संवाददाताओं से कहा, "हम लोगों का यह दौरा बहुत अच्छा रहा। हमने काफी लोगों से मुलाकात की और राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे पुनर्वास कार्यो को भी देखा। सरकार का काम काफी अच्छा है, लेकिन अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है, क्योंकि कई लोग अब भी परेशानी झेल रहे हैं।"

दंगा पीड़ितों की सुरक्षा के बारे में चर्चा के लिए इन मामलों की सुनवाई कर रही त्वरित अदालतों के न्यायाधीशों से भी प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात शुक्रवार को ही तय थी, लेकिन जिला वकील संघ के विरोध के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। वकील संघ का कहना था कि इस तरह की बैठक असंवैधानिक है।

कंधमाल के जिलाधिकारी कृष्ण कुमार ने कहा, "जो लोग वापस आना चाहते हैं, उन्हें हम पूरी सुरक्षा देंगे। यदि कोई डर की वजह से यहां नहीं लौट रहा है, तो हम उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समुचित प्रबंध करेंगे।"

इस प्रतिनिधिमंडल में स्पेन, हंगरी, पोलैंड, आयरलैंड, फिनलैंड, स्वीडन और ब्रिटेन के सदस्य शामिल थे।

उल्लेखनीय है कि भुवनेश्वर से करीब 200 किलोमीटर दूर कंधमाल में 23 अगस्त 2008 को विश्व हिंदू परिषद के नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के बाद फैले सांप्रदायिक दंगों में 25 हजार से ज्यादा ईसाइयों को अपना घर छोड़ना पड़ा था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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