अल्जाइमर के इलाज के लिए ब्रिटेन की बल्लभगढ़ पर नजर
लंदन, 5 फरवरी (आईएएनएस)। हरियाणा का छोटा सा शहर बल्लभगढ़ अल्जाइमर के इलाज की खोज के लिहाज से इन दिनों ब्रिटेनवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान बन गया है।
बल्लभगढ़ में विश्व भर में अल्जाइमर रोग सबसे निचले स्तर पर हैं। इसके उलट एक आंकड़े के मुताबिक ब्रिटेन में अभी 820,000 लोग इस बीमारी से ग्रसित बताए जा रहे हैं। यह आंकड़ा 2015 तक दोगुना हो सकता है। अल्जाइमर व अन्य बीमारियों के इलाज में ब्रिटेन की सरकार को हर वर्ष 23 अरब पाउंड खर्च करने पड़ रहे हैं।
अमेरिका के पीट्सबर्ग विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक शोध के बाद इस बीमारी के इलाज को लेकर ब्रिटेनवासियों के लिए आशा की किरण जगा दी है। पीट्सबर्ग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने 55 वर्ष से अधिक उम्र के बल्लभगढ़ के 5,000 निवासियों पर किए गए शोध के माध्यम से पता लगाया है कि वहां अल्जाइमर का स्तर ब्रिटेन और यहां तक कि अमेरिका से काफी कम है।
शोध में पाया गया है कि हालांकि विकसित देशों की तुलना में बल्लभगढ़ के लोगों का जीवन प्रत्याशा कम है लेकिन वहां के लोग एक मामले में ब्रिटेन और अमेरिका से बेहतर स्थिति में हैं क्योंकि वहां इन दो देशों की तुलना में अल्जाइमर का स्तर भी काफी कम है।
यह स्थिति तब है, जब लोगों में अल्जाइमर को फैलाने में मददगार माने जाने वाले एपीओ4ई जीन का अनुपात बल्लभगढ़ और अमेरिका के पेनिसेल्वेनिया प्रांत के निवासियों में एक तरह से बिल्कुल समान है।
शोधकार्य में जुटे डॉक्टर विजय चंद्रा ने बताया कि अल्जाइमर का स्तर कम होने के कारण बल्लभगढ़ के लोग ज्यादा खुश हैं क्योंकि उनका शरीर स्वस्थ है और दिमाग चुस्त और दुरुस्त है। वहां कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी काफी कम है और यही मुख्य रूप से वहां के लोगों की रक्षा कर रहा है।
ब्रिटेन के विशेषज्ञों का मानना है कि बल्लभगढ़ के लोगों को अल्जाइमर से बचाने में हल्दी, करी पाउडर में पाया जाने वाला आधार घटक, ओमेगा-थ्री फैटी एसिड, विटामिन डी और बी-12 तथा वहां मिलने वाली सब्जियों और फलों में पाया जाने वाला पॉलीफिनोल एंटी-आक्सिडेंट की प्रमुख भूमिका है।
इस रिपोर्ट को लेकर बीबीसी ने लिखा है, "बल्लभगढ़ के लोगों की जिंदगी दुनिया के दूसरे हिस्सों में रहने वाले लोगों जैसी ही व्यस्त, तनावपूर्ण और जटिल है लेकिन इसके बावजूद बल्लभगढ़ के निवासियों के पास हमें सिखाने के लिए काफी कुछ है। वहां के लोग खेतिहर हैं और कम वसायुक्त तथा शाकाहारी भोजन करते हैं। वहां मोटापा जैसी कोई चीज नहीं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications