प्रथम श्रेणी के मधुमेह से पीड़ित बच्चों के लिए 'कृत्रिम अग्न्याशय'
वैज्ञानिकों की टीम ने इसके तहत न सिर्फ एक एल्गोरिद्म (रेखाचित्रों के माध्यम से बीमारी की स्थिति, इलाज के उपायों और विभिन्न तरह के निर्देशों से जुड़ा विश्लेषणात्मक अध्ययन) तैयार करने में सफलता हासिल की है बल्कि उसका सफल परीक्षण भी किया है। इससे 'कृत्रिम अग्न्याशय' के परीक्षण की दिशा में मदद मिलेगी।
यह शोध जुवेलिन डाएबिटीज रिसर्च फाउंडेशन (जेडीआरएफ) द्वारा किया जा रहा है। इसमें पाया गया है कि 'कृत्रिम अग्न्याशय' के उपयोग से हाइपोग्लाइसेमिया (शरीर की जरूरत से कम स्तर तक रक्त शर्करा उत्पन्न करने की क्षमता में कमी) की समस्या से काफी हद तक निजात पाया जा सकता है।
प्रथम श्रेणी के मधुमेह से पीड़ित बच्चों में रात में सोते वक्त रक्त शर्करा का स्तर काफी नीचे चला जाता है। 'कृत्रिम अग्न्याशय' की मदद से शरीर में पैदा होने वाले ग्लूकोज (शर्करा) और इंसुलिन की मात्रा पर नजर रखा जा सकेगा।
शोध रिपोर्ट पांच से 18 वर्ष के उम्र के उन बच्चों पर किए गए परीक्षण पर आधारित है जो प्रथम श्रणी के मधुमेह से ग्रसित थे और इन्हें 54 रातों तक अध्ययन के लिए अस्पताल में रखा गया। इस दौरान बच्चों की उस स्थिति पर भी नजर रखी गई, जब वे रात का भोजन लेने के बाद बिस्तर पर चले गए या फिर शाम के वक्त वर्जिश करते देखे गए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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