धार्मिक संस्थाओं की कर छूट समाप्त करने पर बिफरी भाजपा
केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को मंगलवार को सौंपे एक ज्ञापन में मुख्य विपक्षी दल ने कहा है कि प्रस्ताविक कर संहिता कठोर सत्ता स्थापित करने की कोशिश है। इसमें कर अधिकारियों को मनमाने और विशेषाधिकार देने की बात कही गई है।
प्रस्तावित कर संहिता के बारे में प्राप्त मसौदे के आधार पर तैयार 12 पृष्ठों वाले ज्ञापन में भाजपा ने कहा है, "इस मसले पर आगे बढ़ने से पहले हमने सरकार से इन चिंताओं को दूर करने की बात कही है।"
ज्ञापन में कहा गया है, "यह महसूस किया गया कि ्रप्रस्तावित प्रत्यक्ष कर संहिता आधुनिक भारतीयों की इच्छा के अनुकूल नहीं है, जो अपने मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता में बिना किसी बदलाव के परिवर्तन और प्रगति चाहते हैं।"
प्रस्तावित कर संहिता को 50 साल पुराने आयकर कानून की जगह लाया जाना है। वर्ष 1961 में इस कानून के बनने के बाद से इसमें 4500 बार संशोधन हो चुका है।
ज्ञापन में कहा गया है, "संहिता की दूसरी सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इसमें देश के परोपकारी और धार्मिक संस्थाओं को बर्बाद करने के लिए बहुत ही बारीक कोशिश की गई है।"
भाजपा द्वारा की गई मांगें निम्न हैं :
-कर सीमा की न्यूनतम छूट 3,00,000 रुपये प्रति वर्ष की जाए।
-महिलाओं के लिए यह सीमा 350,000 और वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह 4,00,000 रुपये हो।
-अधिकतम व्यक्तिगत कर 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी किया जाए।
-सरकारी कर्मचारियों के लिए आवास और परिवहन भत्ता से संबंधित प्रावधान को यथावत रखा जाए।
-घर खरीदने या घर में निवेश करने पर उपलब्ध प्रोत्साहन में कटौती न हो।
-भविष्य निधि और बीमा पॉलिसियों के रूप में बचत की अवधि पूरा होने पर छूट जारी रखा जाए।
-लघु अवधि पूंजीगत लाभ और दीर्घावधि पूंजीगत लाभ के बीच अंतर जारी रखा जाए।
- किसी भी स्थिति में धार्मिक संस्थाओं को मिली छूट खत्म न की जाए।
- समाचार एजेंसियों को मिली छूट जारी रखा जाए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications