विकास के साथ महँगाई बढ़ने की आशंका

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा में नकद आरक्षी अनुपात यानी सीआरआर बढ़ाने की घोषणा की है. सीआरआर में 0.75 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है. यह दो चरणों में 13 और 27 फ़रवरी से लागू हो जाएगी.
सीआरआर वाणिज्यिक बैंकों की जमा राशि का वह हिस्सा है जो उन्हें रिजर्व बैंक के पास रखना होता है. पिछले साल अक्तूबर में दूसरी तिमाही समीक्षा में रिजर्व बैंक ने सीआरआर, रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और बैंक रेट किसी में कोई बदलाव नहीं किया था. लेकिन अब सीआरआर पाँच फ़ीसदी से बढ़ा कर 5.75 फ़ीसदी किया गया है. इससे ख़ुदरा कारोबार करने वाले बैंकों के पास नकदी में कमी आएगी और रिजर्व बैंक को लगता है कि बाज़ार में नकदी की कमी से महँगाई पर नियंत्रण पाया जा सकता है.
ये तिमाही समीक्षा से स्पष्ट है जिसमें रिजर्व बैंक ने मार्च तक महँगाई दर साढ़े आठ फ़ीसदी हो जाने की आशंका जताई है और ये माना है कि इसे थामने की कोशिशों का असर आर्थिक सुस्ती से निपटने की गति पर पड़ सकता है.
ब्याज दर बढ़ने की आशंक
कुछ विशेषज्ञ ये भी संभावना जता रहे हैं कि बैंकों के पास नकदी की कमी होने पर आम लोगों को कर्ज़ मिलना और महँगा हो सकता है क्योंकि आम तौर पर ऐसी स्थिति में बैंक ब्याज दरें बढ़ा देते हैं. रिजर्व बैंक ने रेपो रेट (जिस दर पर रिजर्व बैंक से दूसरे बैंकों को कर्ज़ मिलता है) और रिवर्स रेपो रेट (जब बैंक ख़ुद रिजर्व बैंक के पास नकदी जमा करते हैं तब उस पर मिलने वाली ब्याज दर) में कोई बदलाव नहीं किया है.
फिलहाल रेपो रेट 4.75 फ़ीसदी और रिवर्स रेपो रेट 3.25 फ़ीसदी है. सीआरआर बढ़ाने की घोषणा का असर भारत के शेयर बाज़ारों पर भी पड़ा है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स 225 अंकों कि गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है.












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