आईपीसीसी अध्ययन गलत नहीं

Melting Himalaya
मेलबर्न। हिमालय के ग्लेशियरों के वर्ष 2035 तक पिघलने का दावा करने वाली रिपोर्ट के इस निष्कर्ष के गलत साबित होने के बाद इस संस्थान के अध्यक्ष पर उंगली उठायी जा रही हैं। कहा जा रहा है कि अपने संस्थान को पैसा दिलाने के लिए संस्था ने अपनी रिपोर्ट में ये झूठा दावा सपेश किया। लेकिन रिपोर्ट के सहलेखक ने कहा कि किसी एक निष्कर्ष के गलत होने से पूरी रिपोर्ट को नकारा नहीं जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेशनल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) के प्रमुख राजेंद्र पचौरी पर लगाए जा रहे आरोपों से उन्हें बहुत खराब महसूस हो रहा है। एंडी पिटमैन आईपीसीसी की 2001 और 2007 की रिपोर्ट के लेखक हैं। एंडी, न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय के जलवायु परिवर्तन शोध केंद्र के सह निदेशक भी हैं। वह कहते हैं कि ये मसला रिपोर्ट के महज दो पैराग्राफ तक सीमित है। लेकिन रिपोर्ट 1,600 पेज की है। पिटमैन ने कहा कि वर्ष 2035 की तिथि गलत हो सकती है लेकिन नतीजा सही हो सकता है।

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