आईपीसीसी अध्ययन कमतर नहीं : आस्ट्रेलियाई सहलेखक

मेलबर्न, 25 जनवरी (आईएएनएस)। हिमालय के ग्लेशियरों के वर्ष 2035 तक पिघलने का गलत दावा करने वाली रिपोर्ट के सहलेखक ने कहा है कि तिथि में त्रुटि से निष्कर्षो को कमतर नहीं किया जा सकता। साथ उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) के प्रमुख राजेंद्र पचौरी पर अपने संस्थान के लिए कोष स्वीकार कर लाभान्वित होने संबंधी आरोप लगने से उन्हें बहुत खराब महसूस हुआ।

न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय के जलवायु परिवर्तन शोध केंद्र के सह निदेशक और आईपीसीसी की 2001 और 2007 की रिपोर्ट के लेखक एंडी पिटमैन ने कहा, "जहां तक मैं समझता हूं, 1,600 पेज के दस्तावेज के दो पैराग्राफ पर सवाल उठाया गया है।"

उन्होंने एबीसी रेडियो को बताया, "हमें अन्य 1,599 पेजों पर बात करनी चाहिए, जिन पर किसी को कोई आपत्ति नहीं है।"

रिपोर्ट में गलती से दावा किया गया कि हिमालय के ग्लेशियर वर्ष 2035 तक पिघल सकते हैं।

पिटमैन ने कहा कि जबकि वर्ष 2035 की तिथि गलत हो सकती है लेकिन नतीजा वही हो सकता है। रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया कि हिमालय के ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन के लिए उपयोगी नहीं हैं या पिघल नहीं रहे हैं या उनके पिघलने की दर तेज नहीं हो रही। केवल 2035 की तिथि गलत है।

इस गलती के कारण आईपीसीसी के अध्यक्ष पचौरी के शोध संस्थान को कोष मिलने से लाभान्वित होने की संभावना के आरोप पर उन्होंने चिंता जाहिर की।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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