ग्लेशियर पिघल तो रहे हैं: पचौरी

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन पैनल (आईपीसीसी) के अध्यक्ष आरके पचौरी ने स्वीकार किया है कि हिमालय के पिघलने को लेकर आईपीसीसी की रिपोर्ट में ग़लती थी लेकिन इसका मतलब यह हरगिज़ नहीं है कि हिमालय के ग्लेशियर नहीं पिघल रहे हैं.
उन्होंने आईपीसीसी के अध्यक्ष पद छोड़ने के अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा है कि वो इस्तीफ़ा नहीं दे रहे हैं.
पिछले दिनों आईपीसीसी ने हिमालय के ग्लेशियरों के पिघल जाने संबंधी संयुक्त राष्ट्र की वर्ष 2007 की रिपोर्ट से पल्ला झाड़ लिया था जिसमें कहा गया था कि हिमालय के ग्लेशियर दुनिया में सबसे तेज़ी से पिघल रहे हैं और अगर यही हाल रहा तो 2035 तक या इससे पहले भी वे पूरी तरह ग़ायब हो जाएंगे.
दोबारा ग़लती नहीं होगी
शनिवार को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित पचौरी ने एक पत्रवार्ता में कहा, "रिपोर्ट तैयार करने के दौरान आईपीसीसी के स्थापित प्रक्रियाओं और मापदंडों का पालन नहीं किया गया."
उन्होंने कहा कि ऐसी कोशिश की जा रही है कि दोबारा ऐसी ग़लती न हो.
उनका कहना था, "हिमालय के ग्लेशियर किस दर से पिघल रहे हैं इसके बार में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है. इसलिए हम इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकते हैं कि ये ग्लेशियर कब ख़त्म हो जाएंगे. लेकिन यह एक गंभीर समस्या है."
पचौरी ने संवाददाताओं को सफ़ाई दी कि रिपोर्ट के ग़लत होने के लिए कोई एक व्यक्ति ज़िम्मेदार नहीं है.
आपीसीसी की रिपोर्ट में गड़बडी सामने आने के बाद भारत के पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा था कि रिपोर्ट का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था.
उन्होंने कहा था कि आईपीसीसी की रिपोर्ट के ग़लत साबित होने से भारत के रुख़ की पुष्टि हुई है.












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