महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया

बुधवार को महाराष्ट्र सरकार ने नई टैक्सी नीति की घोषणा की, जिसमें टैक्सी चलाने का परमिट लेने के लिए राज्य का निवासी होना, मराठी बोलना, पढ़ना और लिखना अनिवार्य कर दिया गया। मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के नेतृत्व में लिए गए इस फैसले के खिलाफ देश भर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। खास बात यह है कि आखिर भाषा को रोजगार का आधार कैसे बनाया जा सकता है।
महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले से महाराष्ट्र के बाहर से आए लोग सबसे अधिक प्रभावित होंगे। महाराष्ट्र के बाहर से रोजीरोटी की तलाश में आए लोगों के लिए टैक्सी चलाना सबसे बढ़िया रोजगार है। इसके लिए उन्हें आसानी से परमिट भी मिल जाया करती थी।
लालू बोले बिहार के लोगों के साथ ज्यादती
पूर्व रेल मंत्री एवं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने इस फैसले को बिहार के लोगों के साथ ज्यादती बताया वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं राज्य के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस मुद्दे को केन्द्र सरकार के समक्ष उठाने की बात कही है।
पूर्व रेल मंत्री यादव ने महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर कहा कि महाराष्ट्र में राज ठाकरे और बाल ठाकरे के नक्शे कदम पर ही कांग्रेस सरकार सरकार चल रही है। उन्होंने कहा कि यह किस संविधान में लिखा है कि केवल मराठी बोलने वालों को ही टैक्सी का लाइसेंस दिया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने कड़ा विरोध किया
इधर, राज्य के उपमुख्यमंत्री मोदी ने भी महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है। मोदी ने गुरूवार को कहा कि इस मामले पर वह केन्द्र सरकार से बात कर इस आदेश पर रोक लगाने की मांग करेंगे।
मोदी ने कहा कि यह फैसला देश की एकता और अखंडता को तोड़ने की साजिश है। उन्होंने कहा कि मुंबई में दो लाख टैक्सी चालक हैं, जिनमें अधिकांश हिन्दी भाषी हैं। उन्हें रोकने की साजिश हो रही है। मोदी ने कहा कि यह संविधान विरोधी कदम है जो पूरी तरह निन्दनीय है। बिहार कांग्रेस के मीडिया प्रभारी हृदय कुमार वर्मा ने कहा कि मेट्रो सिटी में इस तरह का नियम बनाना बेतूका है।
उन्होंने कहा कि टैक्सी चालकों को मराठी जानने की बाध्यता होने जैसे नियम तर्कसंगत नहीं है। इससे मतभेद बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि बिहार कांग्रेस इस कानून का विरोध करेगी तथा इससे कांग्रेस अध्यक्ष को अवगत कराया जाएगा।
हाई कोर्ट जाएगा मुंबई टैक्सी चालक संघ
सरकार की इस नई नीति के खिलाफ मुंबई टैक्सीमैन यूनियन (एमटीयू) ने बाम्बे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है। राज्य सरकार की नई नीति के तहत टैक्सी चलाने का परमिट लेने के लिए राज्य का निवासी होना, मराठी बोलना, पढ़ना और लिखना अनिवार्य कर दिया गया है।
एमटीयू के नेता एएल कुदरोस ने कहा कि राज्य सरकार का यह निर्णय गैर लोकतांत्रिक और भेदभावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि टैक्सी चालक इसे स्वीकार नहीं करेंगे। कुदरोस ने कहा कि राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ एमटीयू आंदोलन शुरू करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि टैक्सी चालक हड़ताल पर भी जा सकते हैं।
एमटीयू के प्रमुख मुस्ताक कुरैशी ने राज्य सरकार से कहा कि टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए प्र्याप्त समय दिया जाना चाहिए। उधर, सरकार की नीति का बचाव करते हुए राज्य के परिवहन आयुक्त दिलीप जादव ने कहा कि मोटर वाहन कानून (एमवीए) के तहत यह कदम उठाया गया है। जादव ने कहा, "एमवीए की उप-धारा 8 (24) के तहत टैक्सी परमिट धारक का महाराष्ट्र का निवासी होना जरूरी है और उसे मराठी में बातचीत करना अना चाहिए। हम केवल इन प्रावधानों को लागू कर रहे हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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