भारत का धैर्य जवाब दे सकता है: गेट्स

अमरीकी रक्षामंत्री रॉबर्ट गेट्स ने चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा है कि अगर फिर से मुंबई जैसा हमला हुआ तो भारत का धैर्य जवाब दे सकता है.
साथ ही उन्होंने कहा है कि अल-क़ायदा अपने सभी संगठनों के साथ दक्षिण एशिया में अस्थिरता फैलाने और परमाणु शक्ति संपन्न भारत और पाकिस्तान की सेना के बीच युद्ध भड़काने की कोशिश कर रहा है.
चरमपंथ के ख़तरों पर भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रक्षा मंत्री एके एंटनी के साथ चर्चा करने के बाद रॉबर्ट गेट्स ने कहा कि 'आतंक के संघ' से उपजे ख़तरे को परास्त करने के लिए 'उच्च स्तरीय सहयोग' की ज़रुरत है. उन्होंने इस 'आतंक के संघ' को समझाते हुए कहा कि लश्करे तैबा, तालेबान, तहरीक-ए-तालेबान सब अल-क़ायदा के तहत काम कर रहे हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, "अल-क़ायदा जहाँ अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान के साथ काम कर रहा है, तहरीक-ए-तालेबान ने सारा ध्यान पाकिस्तान पर केंद्रित कर रखा है, वहीं लश्करे तैबा ने पाकिस्तान के साथ-साथ भारत में भी ध्यान लगा रखा है."
अपने दो दिनों की यात्रा की समाप्ति पर रॉबर्ट गेट्स ने कहा कि आतंक के इस संघ के लिए 'घर और सबसे सुरक्षित स्थान' अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा के इलाक़े में है और इससे पूऱे क्षेत्र को जो ख़तरा है उसकी गंभीरता को समझने की आवश्यकता है.
भारत की तारीफ़
अमरीकी रक्षा मंत्री ने वर्ष 2008 में मुंबई पर हुए हमलों के बाद भारत के संयम की तारीफ़ करते हुए कहा कि अगर मुंबई जैसा हमला फिर से हुआ तो भारत से उसी तरह के संयम की अपेक्षा नहीं की जा सकती. समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार उन्होंने कहा, "मेरे विचार से ऐसा कहना अनुचित नहीं होगा कि यदि फिर से हमले हुए तो भारत के धैर्य की भी एक सीमा है."
उल्लेखनीय है कि 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों में 166 नागरिक मारे गए थे जिसमें कई विदेशी थे. भारत इन हमलों के लिए लश्करे तैबा को दोषी मानता है और इन हमलों के बाद से लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बनाता रहा है कि वे पाकिस्तान से चरमपंथी संगठनों पर कार्रवाई करने को कहें.
रॉबर्ट गेट्स ने चरमपंथी ख़तरों से निपटने के लिए भारत को एक अहम साझीदार बताया है और साथ ही अफ़ग़ानिस्तान में आर्थिक सहायता देने के लिए भी भारत की तारीफ़ की है.












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