झारखण्ड में बिजली चोरी के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतें
झारखण्ड के उपमुख्यमंत्री रघुबर दास ने बुधवार को आईएएनएस से कहा, "बिजली चोरी के मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए सभी जिलों में विशेष अदालतें स्थापित की जाएंगी। ये मामले कई साल से लंबित हैं और बिजली चोरी रोकने के लिए इन मामलों में त्वरित फैसले की आवश्यकता है।" दास विद्युत विभाग के प्रमुख भी हैं।
उन्होंने कहा, "यदि हम बिजली चोरी रोक पाते हैं तो शहरी इलाकों में बिजली की स्थिति में कुछ हद तक सुधार कर सकते हैं।"
दास ने कहा, "बिजली चोरी रोकने के लिए हम जमीन के अंदर से तार डालना शुरू करेंगे। इससे बिजली चोरी की संभावना बहुत कम हो जाएगी। पहले चरण में हम रांची, जमशेदपुर, बोकारो और धनबाद से भूमिगत तार डालने की शुरुआत करेंगे।"
उन्होंने कहा कि जल्दी ही इस परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी। भूमिगत तार डालने का काम अगले वित्त वर्ष में शुरू हो सकता है।
झारखण्ड राज्य विद्युत बोर्ड (जेएसईबी) के एक अधिकारी ने बताया कि बिजली की चोरी के कारण इसके संचरण के दौरान करीब 20 से 30 प्रतिशत बिजली का नुकसान हो जाता है। बिजली चोरी की वजह से झारखण्ड में 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
अधिकारी ने कहा, "राज्य में कई तरह से बिजली चोरी होती है। तारों में हुक लगाकर बिजली चोरी करना एक तरीका है। घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों के उपभोक्ता मीटर की रीडिंग भी परिवर्तित कर लेते हैं और इससे राजस्व की हानि होती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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