डॉल्फिन राष्ट्रीय जल जीव घोषित
केंद्रीय पर्यावरण एवं वन्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के मुताबिक लगभग 2,000 डॉल्फिनें ही बची हुई हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि अवैध शिकार और आबादी के द्वारा नदी में बहाए जाने वाले कचड़े से डॉल्फिनों की तादाद में तेजी से कमी आई है। भारी मात्रा में जमते गाद और बांध के निर्माण से जल प्रवासी प्रजाति डॉल्फिनों के शरीर जख्मी हो जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि नवगठित राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण ने पिछले वर्ष पांच अक्टूबर को अपनी पहली बैठक में डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जल जीव घोषित करने का फैसला लिया था।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अनुसार डॉल्फिन सात राज्यों असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल की नदियों में पाई जाती हैं। गंगा, चंबल, घाघरा, गंडक, सोन, कोसी, ब्रह्मपुत्र और कुल्सी नदियां डॉल्फिन का पसंदीदा आवास है।
प्रवक्ता ने कहा कि वन्य जीव (सुरक्षा)अधिनियम,1972 के तहत पहली सूची में डॉल्फिन को शामिल किया गया है। इसलिए उसके संरक्षण को लेकर के कड़ाई बरती जा रही है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने कहा है कि इसके बावजूद, एक समन्वित संरक्षण योजना के अभाव, जागरूकता की कमी और आबादी के बढ़ते दबाव की वजह से डॉल्फिन के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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