महंगाई जल्द ही कम होगी : राहुल गांधी (राउंडअप)

मध्य प्रदेश के दो दिवसीय प्रवास पर आए राहुल गांधी से मंगलवार को जब संवाददाताओं ने पूछा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, मोंटेक सिंह अहलूवालिया, पी. चिदम्बरम और प्रणव मुखर्जी जैसे अर्थशास्त्रियों के रहते आम आदमी को एक कटोरी दाल और रोटी के लाले पड़ रहे हैं तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, "देश में महंगाई एक बड़ा मुद्दा है। इस मुद्दे पर मैंने प्रधानमंत्री से भी चर्चा की है। केंद्र सरकार इसके लिए आवश्यक कदम उठा रही है जिसका असर जल्दी ही नजर आएगा।"

पृथक बुंदेलखण्ड के संदर्भ में पूछे गए सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी पृथक बुंदेलखण्ड राज्य की बात नहीं कही है, उन्होंने यही कहा है कि बुंदेलखण्ड पिछड़ा इलाका है और उसके विकास की जरूरत है। गांधी ने कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में फैले बुंदेलखण्ड के लोगों के विकास के लिए प्रधानमंत्री से भी बात की है।

राहुल गांधी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि इस क्षेत्र को लेकर समस्या यह है कि यहां विरोधी दलों की सरकारें हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली से जो राशि भेजी जाती है, वह इस क्षेत्र की जनता की सुविधाओं पर खर्च नहीं की जाती। इसकी जिम्मेदारी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश दोनों राज्यों की सरकारों पर है।

दलितों के घर में खाना खाने और रात बिताने के संदर्भ में पूछे गए एक सवाल के जवाब में राहुल ने कहा कि वह ऐसा नहीं है कि सिर्फ दलितों के घर खाना खाते हैं और रात बिताते हैं। उन्होंने कहा कि वे यह देखकर किसी के घर नहीं जाते कि वह दलित है या फिर किसी अन्य जाति का। "मैं गरीब के घर जाता हूं लेकिन दिक्कत यह है कि मीडिया सिर्फ उन्हीं खबरों को दिखाता है, जब मैं किसी दलित के घर जाता हूं।"

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा केंद्र से आर्थिक सहयोग न मिलने के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश को केंद्र से 1000 करोड़ से बढ़कर 6000 करोड़ रुपये मिले हैं। राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार पर आरोप लगाना आसान है मगर उसके पास इस बात का जवाब नहीं है कि दिल्ली से भेजी गई राशि को ही राज्य सरकार खर्च क्यों नहीं कर पाई है।

कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा कि देश के युवा और खासकर छात्र राजनीति में आकर हिंदुस्तान को बदलना चाहते हैं लेकिन उनके लिए राजनीति का दरवाजा बंद है, इसीलिए भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) और युवक कांग्रेस ने अपने संगठनात्मक चुनाव के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया अपनाई है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एनएसयूआई की चुनाव प्रक्रिया में अपराधियों के प्रवेश को रोकने के पूरे इंतजाम किए गए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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