दोस्ती नहीं रही 'अमर', मुलायम नहीं रहे अब 'मुलायम' (राउंडअप)

नई दिल्ली/लखनऊ, 18 जनवरी (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव व उसके पूर्व महासचिव अमर सिंह की जोड़ी को भारतीय राजनीति की सबसे अटूट जोड़ी कहा जाता था लेकिन अब यह जोड़ी न सिर्फ टूट गई है बल्कि एक दूसरे पर तलवार ताने खड़ी है।

मुलायम ने रविवार को अमर का इस्तीफा स्वीकार किया तो छूटते ही अमर ने सोमवार को कहा कि वह अब मुलायमवादी नहीं बल्कि समाजवादी बनकर रहेंगे ,वहीं मुलायम ने अमर पर सीधा हमला तो नहीं बोला लेकिन उन्हें 'इतिहास' जरूर करार दिया।

अमर ने कहा कि वह अंग्रेजी भाषा और कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गांव और गरीब-गुरबों के बीच जाएंगे तो दूसरी ओर मुलायम ने कहा कि वह अब सड़कों पर उतर आंदोलन करेंगे।

अमर सिंह ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने के बाद पहली बार सोमवार को सार्वजनिक तौर पर मुलायम पर हमला बोला। उन्होंने नई दिल्ली में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "उन्होंने (मुलायम) मुझे बंधन-मुक्त कर दिया।"

अमर ने कहा, "मैंने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ कभी न बोलने का प्रण लिया था और इस प्रण को नहीं तोड़ूंगा। परंतु पार्टी महासचिव के पद पर होने की वजह से कुछ मुद्दे थे जिनके बारे में बात नहीं कर सकता था, लेकिन अब मैं करूंगा।"

अभिनेता से नेता बने संजय दत्त और बहुत से अन्य समर्थकों से घिरे अमर ने उनसे कहा कि वे मुलायमवादी नहीं समाजवादी बने। अमर सिंह ने उनसे मुलायम की चापलूसी न करने को कहा।

उन्होंने हालांकि कहा कि वह आगे भी पार्टी के 'सच्चे सिपाही' बने रहेंगे। "जब तक वे मुझे बाहर नहीं निकाल देंगे, तब तक मैं पार्टी में बना रहूंगा।"

अमर सिंह ने अंग्रेजी भाषा और कंप्यूटर शिक्षा की वकालत की। उन्होंने कहा, "ग्रामीण और शहरी बच्चों के लिए समान शिक्षा होनी चाहिए। अब मैं गांवों में कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा दूंगा। मैं अमिताभ बच्चन से भी अनुरोध करूंगा कि वह ग्रामीण बच्चों को उनके पिछड़ेपन का मुकाबला करने के लिए कंप्यूटर और अंग्रेजी को बढ़ावा देने में मेरी सहायता करें।"

उन्होंने कहा कि वह इसमें सपा सांसद जयाप्रदा की स्वयंसेवी संस्था की भी मदद लेंगे। ज्ञात हो कि सपा ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में अंग्रेजी और कंप्यूटर शिक्षा पर प्रतिबंध लगाने की प्रतिबद्धता जाहिर की थी।

सिंह ने कहा कि उन्होंने पार्टी के प्रमुख पदों से इस्तीफा देने का निर्णय चिकित्सकों की सलाह पर लिया था। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा देना किसी तरह की 'ब्लैमेलिंग' नहीं थी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों अमर सिंह ने दुबई से सपा के महासचिव, प्रवक्ता और संसदीय बोर्ड के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे को पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने रविवार को स्वीकार कर लिया था।

उधर, मुलायम ने लखनऊ में संवाददाताओं से बातचीत में अमर सिंह को 'बीती बात' करार दिया और कहा कि वह हमेशा आगे देखते हैं, पीछे नहीं। पीछे क्या हुआ, वह इस पर नहीं जाते हैं।

मुलायम ने कहा, "जो बीत गई, सो बात गई। मैं हमेशा आगे की सोचता हूं, पीछे की परवाह नहीं करता हूं।"

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने अमर सिंह से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है, काफी देर तक चुप रहने के बाद मुलायम ने कहा, "मैं कुछ नहीं बोलूंगा।"

मुलायम सिंह से यह भी पूछा गया कि दिल्ली में सोमवार को अमर सिंह का स्वागत करने के लिए सपा के कुछ विधायक भी पहुंचे, तो इसके जवाब में मुलायम ने झल्लाते हुए कहा कि आखिर इस बात से आपको क्या परेशानी है।

अमर सिंह के बारे में पूछे गए किसी भी सवाल का सपा अध्यक्ष ने सीधा जवाब नहीं दिया। वह बार-बार दोहरा रहे थे कि जो मुद्दा खत्म हो गया, उस पर वह बात नहीं करना चाहते।

मुलायम ने कहा कि सपा प्रदेश की मायावती सरकार के कुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ मंगलवार को सड़कों पर उतरेगी और पूरे प्रदेश में प्रदशर्न करेगी। लखनऊ में इस आंदोलन का नेतृत्व वह खुद करेंगे और फिलहाल उनका पूरा ध्यान इस प्रदेशव्यापी आंदोलन पर है।

इससे पहले मुलायम ने रविवार को अमर सिंह का इस्तीफा मंजूर कर लिया था। अमर सिंह ने गत 6 जनवरी को पार्टी महासचिव तथा प्रवक्ता पद और संसदीय बोर्ड की सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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