वामपंथ के पुरोधा ज्योति बाबू नहीं रहे (लीड-4)
कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक बसु ने सुबह 11.47 बजे आखिरी सांस ली। माकपा के वरिष्ठ नेता विमान बोस ने उनके निधन की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "ज्योति बसु नहीं रहे।"
ज्योति बसु के निधन पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित सभी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने गहरा शोक प्रकट किया है।
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने इस वयोवृद्ध मार्क्सवादी नेता के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निधन से देश ने एक वरिष्ठ और महत्वपूर्ण जन नेता खो दिया।
पाटील ने अपने शोक संदेश में कहा, "बसु ने जन नेता, एक कुशल प्रशासक और महत्वपूर्ण राजनेता के रूप में अपनी काबिलियत दर्शाई।"
उन्होंने कहा, "सबसे लंबे समय तक देश के किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री बनने का अभूतपूर्व तमगा उनके नाम है। मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के बाद हाल के दिनों में उन्हें एक वरिष्ठ राजनेता के तौर पर देखा जाता था। देश के कई नेता उनसे सलाह लिया करते थे।"
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने बसु के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि वह अपने पीछे एक ऐसा शून्य छोड़ गए हैं जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि बसु ने सार्वजनिक जीवन तथा पश्चिम बंगाल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। "राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी बुद्धिमता और उनका नेतृत्व प्रेरणा का एक स्रोत है। उनके निधन से एक ऐसा शून्य पैदा हो गया है जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी इस वयोवृद्ध नेता के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने बसु को ऐसा निष्ठावान व सबकी सहमति से चलने वाला नेता बताया, जिनसे वह अक्सर सलाह लिया करते थे।
बसु के बेटे चंदन बसु को भेजे शोक संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के इस पूर्व मुख्यमंत्री के निधन से भारतीय राजनीति के एक युग का अंत हो गया।
प्रधानमंत्री ने कहा, "पश्चिम बंगाल में 20 से अधिक वर्षो तक के अपने शासन के दौरान उन्होंने खुद को स्वतंत्र भारत के सबसे कुशल प्रशासक और राजनेता के तौर पर स्थापित किया।"
"वह राष्ट्रीय स्तर पर बहुत ही शक्तिशाली क्षेत्रीय आवाज थे। उन्होंने हमारे संघीय ढांचे को मजबूती प्रदान की।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "व्यक्तिगत रूप से मेरा उनसे लंबा संबंध रहा है। अपने करियर के दौरान अक्सर मैं उनसे पश्चिम बंगाल से संबंधित या फिर राष्ट्रीय महत्व से जुड़े सभी मुद्दों पर सलाह लिया करता था।"
उन्होंने कहा, "उनकी सलाह हमेशा किसी राजनेता की तरह होती थी लेकिन वह व्यवहारिक होती थी क्योंकि वह मूल्यों पर आधारित होती थी। उनके पूरे राजनीतिक जीवन के दौरान उनमें ये गुण विद्यमान रहे।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "ऐसे महान देशभक्त और इतने बड़े विद्वान के निधन से मुझे निजी क्षति हुई है। उनके निधन पर मैं गहरी संवेदना प्रकट करता हूं।"
उन्होंने कहा कि बसु के निधन से भारतीय राजनीति के एक युग का अंत हो गया। छह दशकों से ज्यादा के लंबे अपने राजनीतिक करियर के दौरान उन्होंने अपनी पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया और वाम मोर्चे की सरकार के निर्बाध शासन की विरासत भी छोड़ी, जिसे उन्होंने अपने नेतृत्व और आम राय कायम करने के कौशल से संभव बनाया।
उन्होंने कहा, "70 के दशक में अशांत राज्य में राजनीतिक स्थिरता लाने, भू सुधार कार्यक्रमों से ग्रामीण बदलाव करने, लोकतांत्रिक व विकेंद्रीकृत शासन की उनकी शैली के लिए पश्चिम बंगाल की जनता उन्हें हमेशा याद रखेगी।"
वर्ष 1964 में माकपा की स्थापना करने वाले पोलित ब्यूरो के नौ सदस्यों में अंतिम बसु को शनिवार को प्रधानमंत्री ने 'भारत का महान सपूत' करार दिया था।
कोलकाता में 1914 में जन्मे बसु 1977 में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने और 23 वर्षो तक इस पद पर आसीन रहे। नवंबर 2000 में स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने यह पद त्याग दिया था। उन्हें सबसे लंबे अर्से तक देश के किसी राज्य का मुख्यमंत्री रहने का गौरव हासिल है।
उनके निधन का समाचार फैलते ही हर तरफ शोक की लहर फैल गई। दिवंगत नेता के सम्मान में पार्टी के सभी कार्यालयों के ध्वज झुका दिए गए।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने शोक संदेश में कहा कि बसु के निधन से भारतीय राजनीति का एक अध्याय समाप्त हो गया।
माकपा महासचिव प्रकाश करात ने बसु के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा, "ज्योति बसु जैसा फिर कोई नहीं होगा।"
करात ने कहा कि बसु माकपा, वामपंथी आंदोलन और देश के एक महान नेता थे। उनके निधन से एक युग का अंत हो गया। ज्ञात हो कि वह करात ही थे जिन्होंने बसु को 1996 में देश का प्रधानमंत्री बनने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा, "70 साल के सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक गतिविधियों के बाद वह देश के सबसे प्रसिद्ध वामपंथी नेता बने। वामपंथ के प्रति समर्पित बसु स्वतंत्र भारत के उन नेताओं में थे जिन्होंने लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता को वास्तविक मजबूती दी तथा आम आदमी को भारतीय राजनीति के केंद्र में लाने में अहम भूमिका निभाई।"
"23 वर्षो तक पश्चिम बंगाल का मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने भूमि सुधार के क्षेत्र में बहुत बड़ा योगदान दिया और लाखों लोगों को इसका फायदा पहुंचाया। उन्होंने पंचायत संस्थाओं को मजबूती दी और राज्य में धर्मनिरपेक्षता का माहौल बनाया।"
गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने एएमआरआई अस्पताल के बाहर संवाददाताओं को बताया, "हमें अभी-अभी ज्योति बसु के निधन का दुखद समाचार मिला है। उन्हें प्रेम से ज्योति बाबू कहकर पुकारा जाता था।"
चिदंबरम ने कहा, "वह एक महान विभूति थे जो दशकों तक भारतीय राजनीति के पटल पर विद्यमान रहे। वह पश्चिम बंगाल के ही नहीं, बल्कि भारत के नेता थे। वह महान देशभक्त, महान लोकतांत्रिक नेता और प्रेरणा के महान स्रोत थे। उन्होंने भारतीय जनता की बेहतरीन सेवा की।"
बसु को देश के बहुमूल्य सपूतों में से एक करार देते हुए कांग्रेस ने कहा कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में सादगी से जनता की सेवा की।कांग्रेस के प्रवक्ता शकील अहमद ने कहा कि बसु का निधन सिर्फ पश्चिम बंगाल और माकपा के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए क्षति है।
अहमद ने आईएएनएस से कहा, "निस्संदेह वह भारत के बहुमूल्य सपूत थे। उन्होंने अपना जीवन सादगी से जिया और सार्वजनिक जीवन में सच्चाई का साथ दिया।"
मार्क्सवाद व वामपंथ का निरंतर विरोध करने वाले प्रमुख दक्षिणपंथी राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने वयोवृद्ध बसु के निधन पर शोक जताया। पार्टी ने उन्हें भारतीय राजनीति का आदर्श बताया है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि ज्योति बाबू भारतीय राजनीति में सबसे लंबे समय तक विद्यमान रहने वाले सबसे विश्वसनीय नेता थे।
उन्होंने कहा, "समकालीन नेताओं में उनका कद सबसे ऊंचा था। वह अपनी विचारधारा के प्रति समर्पित थे और उन्होंने भारतीय राजनीति की सबसे लंबी पारी खेली।"
जेटली ने कहा, "उनकी विश्वसनीयता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता था। हमारी पार्टी उनके निधन पर गहरा व्यक्त करती है। वह उन नेताओं में थे जिनसे हम सभी ने कुछ न कुछ सीखा है।"
माकपा पोलित ब्यूरो की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "ज्योति बसु ऐसे मार्क्सवादी थे जिनका विश्वास कभी भी डगमगाया नहीं। वह ऐसे मार्क्सवादी थे, जो हठी नहीं थे और पार्टी की दिशा तय करने के लिए हमेशा अपने व्यापक अनुभवों से सीख लेते रहे।"
अपने दिवंगत प्रिय कामरेड को याद करते हुए माकपा ने कहा, "हम उनके मकसद और कार्यों को आगे ले जाने का प्रयास करेंगे।"
पोलित ब्यूरो के बयान में कहा गया है, "देश का वाम आंदोलन खुशकिस्मत है कि उसे ऐसे संपूर्ण और समर्पित नेता की नुमाइंदगी, पश्चिम बंगाल में ऐसा संचालन तथा लंबे अर्से तक पार्टी का ऐसा नेतृत्व मिला। हम सभी के पास उनकी बहुमूल्य विरासत है जिसे हम संजोकर रखें तथा आगे बढ़ाएं।"
केरल के मुख्यमंत्री वी. एस. अच्युतानंदन ने ज्योति बसु के निधन को बहुत बड़ी क्षति बताते हुए उन्हें आधुनिक बंगाल का निर्माता करार दिया।
अपने गृह नगर में संवाददाताओं से बातचीत में अच्युतानंदन ने कहा, "वह हमारी पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता थे। उनका निधन वामपंथी आंदोलन के लिए बहुत बड़ी क्षति है। वह भले ही एक समृद्ध परिवार से थे और कानून की पढ़ाई करने के लिए विदेश गए लेकिन वहां से लौटने के बाद वह पार्टी को मजबूत करने में जुटे और ऐसा उन्होंने गांवों में जाकर किया।"
उन्होंने कहा कि बसु भारतीय कामगार संघ केंद्र के संस्थापक थे और उन्होंने पश्चिम बंगाल के लिए खासकर भूमि सुधार के क्षेत्र में बहुत काम किया।
अच्युतानंदन ने कहा, "आज जो बंगाल दिखता है उसके निर्माता ज्योति बसु ही हैं। इसके अलावा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने और तीसरा विकल्प खड़ा करने में उन्होंने बहुमूल्य योगदान दिया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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