भारतीय विमान के अपहृर्ता पर कनाडा में वकालत पर रोक

टोरंटो, 17 जनवरी (आईएएनएस)। कनाडा ने वर्ष 1984 में एक भारतीय विमान का अपहरण कर उसे लाहौर ले जाने की घटना के मुख्य सूत्रधार को वकालत करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है।

कनाडा में 15 वर्ष पहले शरण लेने वाले परमिंदर सिंह सैनी (46 वर्ष) ने पिछले वर्ष कानूनी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वकालत की अनुमति मांगी थी। कनाडा की ऊपरी कानूनी समिति ने अब फैसला दिया है कि खराब चरित्र के कारण सैनी वकालत नहीं कर सकता।

सैनी की याचिका को खारिज करते हुए कानूनी समिति ने कहा कि वह कनाडा में वकालत नहीं कर सकता क्योंकि विमान का अपहरण एक गंभीर अपराध है और उसे अब भी एक ऐसे व्यक्ति का दर्जा दिया गया है जो खतरा है।

सैनी वर्ष 1995 में एक फर्जी अफगान पासपोर्ट के सहारे कनाडा में दाखिल हुआ जिस पर उसका नाम बलबीर सिंह लिखा था। उसने कहा कि भारत भेजे जाने के भय से उसने अपना नाम गलत बताया। सैनी छह जुलाई 1984 को श्रीनगर से नई दिल्ली जा रहे इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण करने वाले पांच सिख युवकों का नेता था। विमान में 255 यात्री सवार थे और इसे पाकिस्तान के लाहौर ले जाया गया।

अपहृर्ताओं के पाकिस्तानी पुलिस के सामने समर्पण करने के बाद करीब 17 घंटे तक चला अपहरण का नाटक समाप्त हुआ।

पाकिस्तान में चले मुकदमे में सैनी को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। बाद में उसकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया। पाकिस्तान छोड़ने की शर्त पर उसे 10 वर्ष बाद रिहा कर दिया गया।

पाकिस्तानी अधिकारियों ने कनाडा जाने के लिए उसके फर्जी पासपोर्ट का बंदोबस्त किया। कनाडा पहुंचकर उसने स्नातक और कानून की पढ़ाई पूरी की।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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