बसु को पराजित करने वाले ने दी श्रद्धांजलि
बसु की लंबी बीमारी के बाद यहां रविवार को निधन हो गया। ज्योति बसु अपने राजनीतिक जीवन में एक बार 1972 में विधानसभा चुनाव में पराजित हुए थे। उन्हें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के शिबपद भट्टाचार्य ने पराजित किया था।
भट्टाचार्य ने बसु को उत्तर 24 परगना जिले की बाड़ानगर विधानसभा सीट से 40,000 से अधिक मतों से पराजित किया था। उसके बाद बसु उसी सीट से लगातार छह बार (1952-1971) चुनाव जीते थे।
भट्टाचार्य ने आईएएनएस को बताया, "भारत में पैदा हुए कम्युनिस्ट नेताओं में ज्योति बसु एक महान नेता था। वह संसदीय लोकतंत्र के प्रमुख जानकार थे।"
भट्टाचार्य 1972 के उस क्षण को याद करते हैं, जब चुनाव परिणाम घोषित किया गया था। भट्टाचार्य ने कहा, "मैं अपनी जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त था, लेकिन थोड़ा सशंकित इसलिए था क्योंकि मैं एक ऐसे व्यक्ति के सामने खड़ा था जो अपराजेय माना जाता था।"
बसु और भट्टाचार्य 1964 में भाकपा के विभाजन के समय तक साथी कामरेड थे। उसके बाद बसु मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) में शामिल हो गए थे।
भट्टाचार्य वर्ष 1964 तक बसु के चुनाव के दौरान उनके सहयोगी हुआ करते थे। वह उन दिनों को याद करते हैं, "पार्टी के विभाजन के पहले मैं उनके चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी संभालता था। मैं उनके शांत स्वभाव और परखने की क्षमता का मुरीद था। उन दिनों बसु के पास वह राजनीतिक चमक नहीं थी, जो उन्हें बाद में हासिल हुई।"
पश्चिम बंगाल में वाममोर्चा के 1977 में सत्ता संभालने के बाद बसु मुख्यमंत्री बने। भाकपा 1980 में उस गठबंधन में शामिल हुई।
भट्टाचार्य ने कहा, "मुख्यमंत्री और सत्ताधारी वाममोर्चे के वरिष्ठ नेता के रूप में बसु ने कई बार बाड़ानगर क्षेत्र का दौरा किया और वहां सार्वजनिक सभाओं व बैठकों में हिस्सा लिया। हम दोनों एक साथ मंच पर भी उपस्थित रहे, लेकिन हमारे बीच मुश्किल से बातचीत हो पाई।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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