ज्योति बाबू को ब्लॉग जगत का 'लाल सलाम'

नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की ज्योति बुझ गई। रविवार सुबह 11.47 बजे कोलकाता के एएमआरआई अस्पताल में ज्योति बसु ने आखिरी सांस ली। ज्योति बसु के निधन की पुष्टि करते हुए कोलकाता में पत्रकारों से बिमान बोस ने कहा "ज्योति बसु इज नो मोर विद अस।"

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वयोवृद्ध नेता ज्योति बसु के निधन से ब्लॉग जगत में उदासी छा गई है। 'विस्फोट डॉट कॉम' ने 'बुझ गई बंगाल की ज्योति' के जरिए बसु को श्रद्धांजलि दी है। विस्फोट ने टिप्पणी की है कि देश की वामपंथी राजनीति में ऊंचे ओहदे पर आसीन ज्योति बसु के निधन से न केवल माकपा में शोक की लहर दौड़ गई है बल्कि अन्य राजनीतिक दल भी गहरा दुख व्यक्त कर रहे हैं।

'जनज्वार' ने टिप्पणी की है, "बसु के विरोधी हों या समर्थक उन्हें भारत के प्रथम प्रधानंमत्री जवाहर लाल नेहरू के बाद सबसे बड़ा नेता मानते हैं। भारत में कम्युनिस्ट राजनीति को स्थापित करने वालों में से बसु एक रहे हैं। भारतीय राजनीतिक समाज नक्सलबाड़ी विद्रोह में उनकी क्रांतिकारी भूमिका को और संसदीय राजनीति में मार्क्‍सवाद के अंगद के रूप में हमेशा याद रखेगा क्योंकि उनके कामों और व्यक्त्वि की तारीफ करें या आलोचना इन दोनों भूमिकाओं का जिक्र किए बगैर बात पूरी नहीं हो पाएगी।"

'आनंद' की टिप्पणी है, "बसु कम्युनिस्ट कम और व्यवहारिक अधिक दिखते थे। वह एक सामाजिक प्रजातांत्रिक शख्स थे लेकिन उनकी सफलता यह संकेत देती है कि सामाजिक लोकतंत्र का तो भविष्य है लेकिन साम्यवाद का अब और नहीं.। पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु की सरकार ने जमींदारों और सरकारी कब्जे वाली जमीनों का मालिकाना हक करीब 10 लाख भूमिहीन किसानों को दे दिया था। उनकी सरकार ने ग्रामीम क्षेत्रों में गरीबी दूर करने में काफी हद तक सफलता पाई थी।"

ऑनलाइन दुनिया में बसु को लगातार श्रद्धांजलि दी जा रही है। फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल नेटवर्किं ग वेबसाइट्स पर भी उनकी चर्चा हो रही है। इन मंचों पर कहा जा रहा है कि बसु के निधन के साथ देश में वामपंथी आंदोलन का एक अध्याय समाप्त हो गया और उनके निधन से पैदा हुए शून्य को भर पाना शायद ही संभव हो। 'जनज्वार' ने इस कविता के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि दी- "जब कभी भी लौटकर उन राहों से गुजरेंगे हम/ जीत के ये गीत कई-कई बार फिर हम गाएंगे/ भूल कैसे पाएंगे मिट्टी तुम्हारी साथियों/जर्रे-जर्रे में तुम्हारी ही समाधि पाएंगे.।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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