सूर्यग्रहण: सबसे पहले कन्याकुमारी में दिखा अद्भुत नजारा (लीड-1)
सहस्राब्दी के सबसे लंबा सूर्यग्रहण कुंडलाकार है। सूर्यग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और इसकी छाया सूर्य पर पड़ती है, जिसकी वजह से सूर्य आंशिक अथवा पूरी तरह ढक जाता है।
कन्याकुमारी के जिलाधिकारी राजेंद्र रत्नु ने कहा, "लोकनिर्माण विभाग के गेस्टहाउस में टेलीविजन स्क्रीन लगाकर सूर्यग्रहण का नजारा दिखाया जा रहा है। टेलीविजन स्क्रीन को टेलीस्कोप से जोड़ दिया गया है।"
जिलाधिकारी ने कहा कि सूर्यग्रहण को देखने के लिए कन्याकुमारी में 25 राज्यों से लगभग 750 छात्र पहुंचे हैं। इस बार सूर्यग्रहण पूर्ण नहीं है लेकिन चांद पूरी तरह से सूर्य को ढक लेगा, जिससे सूरज का सिर्फ किनारे का हिसा ही एक छल्ले के तौर पर देखा जा सकेगा।
आम बोलचाल की भाषा में इसे 'गोल्डन रिंग' या 'रिंग ऑफ फायर' कहते हैं, जबकि पूर्ण सूर्यग्रहण होने पर 'डायमंड रिंग' बनती है। देश में 22 नवंबर 1965 को 'रिंग ऑफ फायर' देखा गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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