राजस्थान को पेयजल के लिए विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग
बैठक में राजस्थान के उद्योग मंत्री राजेन्द्र पारीक ने यह मांग रखी। मुख्यमंत्री गहलोत, जिनके पास वित्त मंत्री का कार्यभार भी है, अपरिहार्य कारणों से बैठक में भाग नहीं ले सके। मुख्यमंत्री के लिखित भाषण के प्रमुख अंशों को पारीक ने प्रभावी ढंग से रखा। प्रमुख वित्त सचिव, सी.के.मैथ्यू, वित्त सचिव दीपक उप्रेती और वित्त विभाग के निदेशक विनोद पांडे ने भी बैठक में भाग लिया।
पारीक ने बताया कि मरूस्थलीय प्रदेश राजस्थान में पीने के पानी की गंभीर समस्या है और मात्र एक प्रतिशत जल संसाधन ही उपलब्ध है। राज्य में सतही पानी की उपलब्धता बहुत सीमित होने के कारण लगभग 92 प्रतिशत पेयजल परियोजनाएं भू-जल पर ही आधारित है। उन्होंने बताया कि चालू वर्ष में भी बड़ी संख्या में गांवों, ढाणियों व कई शहरों एवं कस्बों में टैंकरों से पेयजल की आपूर्ति करनी पड़ेगी।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के नये दिशा-निर्देशों के कारण राज्य के ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के लिए भी वार्षिक केन्द्रीय आंबटन में 500 करोड़ रूपए की कमी हो गई है। फलस्वरूप इन परियोजनाओं की क्रियान्वयन पर प्रतिकूल असर हो रहा है। उन्होंने मांग की कि राजस्थान की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नये दिशा-निर्देशों पर पुन: विचार किया जाए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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