नई प्रौद्योगिकी से जल के शुद्धिकरण में आएगा क्रांतिकारी परिवर्तन
यद्यपि वर्तमान प्रौद्योगिकों के इस्तेमाल से पानी में से धूल के कण अलग किए जा सकते हैं और उसमें उपस्थित रोगाणुओं को नष्ट किया जा सकता है लेकिन यह प्रौद्योगिकी दवाओं, कीटनाशकों और सौंदर्य प्रसाधनों के महीन विषाक्त पदार्थो को अलग नहीं कर पाती है।
ओटावा के कार्लिटन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता बानू ओरमेसी और एडवार्ड लाई ऐसे महीने कण विकसित कर रहे हैं जो फैक्ट्रीयों और मल शोधक संयंत्रों से निकले जल से प्रदूषकों को दूर कर सकेंगे।
ये महीन कण जल में मौजूद गंदगी को खुद से बांध लेंगे और इस तरह जल का शुद्धिकरण हो सकेगा।
शोधकर्ताओं का कहना है कि उनके द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी से शुद्धिकरण में कम लागत आएगी और इसके लिए मौजूदा उपचार संयंत्रों में अधिक बदलाव करने की आवश्यकता नहीं होगी।
शोधकर्ता ओरमेसी कहती हैं कि जल में दवाओं के अंश, सौंदर्य प्रसाधन और सेंट्स के अंश हो सकते हैं, जो कि मानव के लिए हानिकारक होते हैं। उन्होंने बताया कि नई तकनीक से इन हानिकारक पदार्थो को दूर किया जा सकेगा।
अगले दो वर्षो तक यह शोध कार्य चलेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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