'मीडिया ने की है ग़लत रिपोर्टिंग'

विदेश राज्य मंत्रि शशि थरुर ने कहा है कि उनके बयानों को मीडिया ने तोड़ मरोड़ कर पेश किया है और ग़लत रिपोर्टिंग की है.
शनिवार को नई दिल्ली में इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स की एक संगोष्ठी में थरुर ने कथित रुप से पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की विदेश नीति की आलोचना का अनुमोदन किया था.
इस संबंध में हर अख़बार में छपी रिपोर्टों के बाद रविवार को थरुर ने प्रेस कांफ्रेंस बुलाई और मीडिया को आड़े हाथों लिया.
कुछ अख़बारों की रिपोर्टों से ख़ासे नाराज़ दिखे थरुर का कहना कहना था, ‘‘ये ग़ैर ज़िम्मेदाराना रिपोर्टिंग हैं. मैंने ऐसा कुछ भी नहीं कहा जो अख़बारों की सुर्खियों में है. मेरे बयानों को संदर्भ से बाहर निकालकर दिखाया गया है जो ग़लत है.’’
संगोष्ठी में विदेश नीति समेत कई मुद्दों पर जाने माने बुद्धिजीवियों के बीच चर्चा हुई थी जिसका समापन करते हुए थरुर ने भीखू पारेख की राय से सहमति जताई थी.
इस बारे में थरुर ने साफ़ किया कि वो भारतीय पहचान के बारे में भीखू पारेख की बातों से हमेशा से सहमत थे और रहेंगे.
उनका कहना था, ‘‘ मुझे दुःख है कि चर्चा में बैठे लोग का बौद्धिक स्तर, ज्ञान और चीज़ों की समझ नहीं थी कि वो इस चर्चा का मर्म समझते. मीडिया ने कुछ बयान उठाए और उसे संदर्भ से बाहर रखकर सुर्खी बना दी.’’
माना जा रहा है कि मंत्रि बनने के बाद ट्विटर पर अपनी टिप्पणियों के कारण चर्चा में रहे थरुर इस बार ख़ासी परेशानी में फंस गए हैं.
यह पूछे जाने पर कि क्या प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और विदेश मंत्रि एसएम कृष्णा ने उनसे इस बारे में बातचीत की है, तो थरुर का कहना था, ‘‘ देखिए जो निजी बातचीत हुई है वो तो मैं आपको बता नहीं सकता लेकिन मैं इतना कह सकता हूं कि मैं कभी भी ऐसी बात नहीं की जिसे मीडिया सुर्खियां बना रहा है.’’
थरुर ने यहां तक कहा कि वो कुछ अख़बारों के ख़िलाफ़ कार्रवाई भी कर सकते हैं और उन्होंने इन अख़बारों से स्पष्टीकरण मांगा है.
मंत्री बनने के बाद ट्विटर पर भारत के विमानों में सामान्य वर्ग में यात्रा करने वालों के लिए " कैटल क्लास" शब्द का इस्तेमाल करके थरूर पहले भी विवादों के घेरे में आ चुके हैं.












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