हीरों की तलाश में उपराष्ट्रपति बोत्सवाना रवाना
लिलोंग्वे (मलावी), 9 जनवरी (आईएएनएस)। भारत हीरा समृद्ध दक्षिणी अफ्रीकी देश बोत्सवाना से हीरा आयात को बढ़ावा देने के प्रयास में है। प्रत्यक्ष निवेश बढ़ाकर भारत की निजी कंपनियों को बिना बिचौलियों के कच्चा हीरा मिलने की उम्मीद है।
मलावी से शनिवार को बोत्सवाना पहुंचने वाले उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पहले ही इस उद्देश्य का उल्लेख कर चुके हैं। राष्ट्रपति की दक्षिणी अफ्रीका के तीन देशों के दौरे का यह अंतिम पड़ाव है। अंसारी सबसे पहले जांबिया पहुंचे थे।
मंगलवार को तीन देशों के दौरे पर रवाना होने से पहले उपराष्ट्रपति ने नई दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, "बोत्सवाना दुनिया का पहला या दूसरा बड़ा हीरा उत्पादक है और गुजरात में हमारे पास हीरा तराशने का बड़ा उद्योग है।"
भारतीय अधिकारियों के अनुसार उपराष्ट्रपति के तीन दिन के बोत्सवाना दौरे के दौरान भारत अधिक से अधिक कच्चे हीरों को खरीद को सुविधाजनक बनाने के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करेगा।
बोत्सवाना के अधिकारियों ने यह स्वीकार किया कि हीरा विक्रेताओं की संख्या को बढ़ाना बुद्धिमानी होगी। अभी तक बोत्सवाना सरकार और दुनिया की सबसे बड़ी हीरा वितरक कंपनी डी बीयर्स का संयुक्त उद्यम डेब्सवाना ही वहां की सबसे बड़ी हीरा खनन कंपनी है।
मंदी के कारण डी बीयर्स सभी हीरा खदानों से निकलने वाले हीरों को खरीदने में अक्षम साबित हुई। इसने कुछ कर्मचारियों की छंटनी की और वर्ष 2009 में चार खानों में काम रोक दिया।
बोत्सवाना की आजादी के 20 वर्ष पूरे होने के अवसर पर वर्ष 1986 में उपराष्ट्रपतिआर. वेंकटरमण के दौरे के बाद से किसी भी वरिष्ठ भारतीय नेता ने बोत्सवाना का दौरा नहीं किया।
बोत्सवाना का क्षेत्रफल 582,000 वर्ग किलोमीटर और जनसंख्या 18 लाख है। बहुदलीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण बोत्सवाना को अफ्रीका में अक्सर अच्छे शासन का उदाहरण माना जाता है।
बोत्सवाना के साथ भारत के अच्छे रक्षा संबंध हैं। भारतीय थलसेना और वायुसेना का एक प्रशिक्षण दल वर्ष 1978 से ही बोत्सवाना में कार्यरत है। इस समय प्रशिक्षक दल के सदस्यों की संख्या 25 है, जिसमें थलसेना के 17 सदस्य हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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