प्रवासी भारतीय दिवस : प्रधानमंत्री का अनिवासियों को मताधिकार व सामाजिक सुरक्षा का आश्वासन (राउंडअप)

प्रधानमंत्री ने भारतीय प्रवासियों के वार्षिक सम्मेलन में कहा, "मैं दूसरे देशों में रह रहे भारतीयों के मताधिकार और देश की सरकार में उनकी भागीदारी की वैध इच्छा का आदर करता हूं।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "हम इस मुद्दे पर काम कर रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि अगले आम चुनाव तक आप मतदान का मौका पा सकेंगे।"

उन्होंने कहा, "मैं एक कदम और आगे जाता हूं और पूछता हूं कि विदेशों में रह रहे भारतीय स्वदेश लौटकर राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में क्यों नहीं प्रवेश करते जैसा कि वे व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में कर रहे हैं।"

प्रवासी भारतीय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित सम्मेलन में करीब 1500 अनिवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी तुलना अक्सर 'धीरे-धीरे चलने वाले हाथी' से की जाती है लेकिन हमारे हर कदम की गहरी छाप होती है। उन्होंने आशा जताई कि आने वाले समय में विकास की दर 9-10 फीसदी रहेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा, "हम अपने उन शुभचिंतकों की परेशानी समझते हैं जो इस बात से निराश होते हैं कि यहां चीजें तेजी से आगे क्यों नहीं बढ़ रही हैं या फिर क्यों योजनाओं और नीतियों का भलीभांति क्रियान्वयन नहीं होता है।"

प्रधानमंत्री ने अनिवासीय भारतीयों से निवेश बढ़ाने की अपील करते हुए कहा, "निवेश के लिहाज से भारत आज सबसे बेहतरीन स्थानों में से एक है। आर्थिक संभावनाएं हर जगह बढ़ रही हैं।"

उन्होंने कहा, "अनिवासी भारतीय अच्छे बचतकर्ता होने के साथ ही कुछ हद तक निवेशक भी हैं। ज्यादातर धन को बैंकों में जमा किया जाता है। देश में अनिवासीय भारतीयों द्वारा प्रत्यक्ष निवेश अपेक्षाकृत काफी कम रहा है। मैं अनिवासी भारतीयों से आग्रह करता हूं कि वे देश में निवेश की दीर्घकालीन संभावनाओं की ओर ध्यान लगाएं।"

बीते वित्त वर्ष में अनिवासी भारतीयों ने 50 अरब डॉलर से अधिक धन देश में भेजा था।

प्रधानमंत्री ने कहा, "पिछले साल दुनिया को अभूतपूर्व आर्थिक और वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था ने संकट का बेहतर ढंग से सामना किया।"

उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि इस साल हमारी अर्थव्यवस्था सात फीसदी की दर से बढ़ेगी, जो दुनिया की सबसे तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगी। हमें यह भी आशा है कि हम जल्द ही 9-10 फीसदी की विकास दर की राह पर लौट आएंगे।"

प्रधानमंत्री के अनुसार हाल के कुछ वर्षो में गरीबी, शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार के बावजूद बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने इन क्षेत्रों में लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रवासी भारतीयों से सहायता की अपील की।

प्रधानमंत्री ने अनिवासी भारतीयों की सामाजिक सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए कहा कि बेहतर सुविधाओं के लिए सरकार उन देशों के साथ बातचीत कर रही है जहां बड़ी संख्या में प्रवासी कामगार हैं। इस बारे में मलेशिया, बहरीन और कतर के साथ समझौता किया जा चुका है। प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में एक भारतीय छात्र की हत्या के बाद आई है।

उन्होंने कहा, "हमने स्विट्जरलैंड, लग्जमबर्ग और नीदरलैंड के साथ पिछले साल सामाजिक सुरक्षा समझौता किया था और कई देशों के साथ इस बारे में बातचीत चल रही है।"

प्रधानमंत्री ने आर्थिक संकट के कारण स्वदेश लौटे लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा का आश्वासन दिया।

उन्होंने कहा कि विदेशों से आने वाली 50 अरब डॉलर से अधिक की राशि में से 40 फीसदी कुशल और अर्धकुशल कामगार भेजते हैं और इनमें से अधिकतर आर्थिक मंदी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, "हम एक उपयुक्त वापसी और पुनर्वास कोष की जरूरत के प्रति सचेत हैं। हम विदेश से लौटने वाले कामगारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए एक परियोजना पर काम कर रहे हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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