'मेरी मदद करो, मैं मर रहा हूं'

मेलबर्न, 5 जनवरी (आईएएनएस)। 'मेरी मदद करो, मैं मर रहा हूं।' दिल दहला देनी वाली यह गुहार उस शख्स की थी जिसने अपने इंद्रधनुषी सपने को हकीकत में बदलने के लिए इस शहर को अपना घर बनाया था, पर शहर उसके लिए मौत का अड्डा साबित हुआ। चाकुओं से गोदे गए नितिन की आवाज इस गुहार के बाद खामोश हो गई थी, और वह लाश में तब्दील हो चुका था।

मौते की आगोश में जाने से पहले 21 वर्षीय नितिन ने भर्रायी आवाज में जो गुहार लगाई थी, उसे उसके साथी कभी नहीं भूल पायेंगे। लड़खड़ाते पांव से फास्ट फूड रेस्तरां में पहुंचकर उन्होंने मदद के लिए आवाज लगाई थी।

इस हादसे की खबर सुनकर उनके साथ किराए के मकान में रहने वाले उनके साथी संदीप और परमिंदर सिंह रॉयल मेलबर्न हॉस्पिटल पहुंचे, पर तब तक नितिन का शरीर ठंडा पड़ चुका था। जिस रेस्तरां में पहुंचकर उन्होंने मदद की गुहार लगाई थी, उसके कर्मचारियों का कहना है कि उस वक्त नितिन की आंखें तेजी से बुझती जा रही थीं और ओंठ नीले पड़ गए थे।

नितिन अपने अन्य सात साथियों के साथ किराए के मकान में रहते थे। संदीप का कहना है मिलनसार स्वभाव के नितिन को लोग भाई की तरह प्यार देते थे। ये सभी एक कुनबे की तरह रहते थे।

संदीप ने ही नितिन के भाई को फोन पर इस हादसे की खबर दी थी। वह कहते हैं, ''मैंने कांपती आवाज में जब भारत फोन लगाकर नितिन के भाई को यह सब बताया तो उन्हें सहसा विश्वास नहीं हुआ।''

परमिंदर सिंह बताते हैं,रेस्तरां पहुंचने तक नितिन की हालत काफी बिगड़ चुकी थी। नितिन वहां अपने एक सहयोगी की बांहों में झूल गया और उससे मदद की गुहार लगाई। उनके मुताबिक नितिन का अंतिम वाक्य था -'मेरी मदद कर करो, मैं मर रहा हूं।'

दोस्तों के मुताबिक नितिन को इतनी बेरहमी से चाकू से गोदा गया था कि उसके सीने में बड़ा सुराख हो गया था। डाक्टरों ने इसकी पुष्टि की कि चाकू का वार इतना जबरदस्त था कि नितिन के सीने से लेकर पेट तक बड़ा सुराख हो गया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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