तालिबान ने सीआईए अधिकारियों को मार गिराने का दावा किया

अरुण कुमार

वाशिंगटन, 4 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों के ही तालिबानी गुटों ने उस आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली है जिसमें अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के सात अधिकारी मारे गए थे परंतु विशेषज्ञों ने कहा कि सबूतों से लगता है कि हमले का जिम्मेदार अफगान तालिबान है।

समाचार चैनल 'सीएनएन' ने विश्लेषकों के हवाले से रविवार को कहा कि दोनों गुटों द्वारा हमले की जिम्मेदारी लेना अपनी साख बढ़ाना और नए चंदे तथा नई भर्तियां हासिल करने का प्रयास हो सकता है।

यह हमला पाकिस्तान सीमा से लगे खोस्त प्रांत के चापमान स्थित अग्रिम संचालन अड्डे पर हुआ। खुफिया अधिकारी इसे सीआईए की एक महत्वपूर्ण चौकी और उसकी गतिविधियों का केंद्र मानते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय खुफिया कंपनी स्ट्रेटफोर की विश्लेषण निदेशक रेवा भल्ला ने सीएनएन को बताया कि आरंभिक रिपोर्टों से संकेत मिला है कि एक स्थानीय कबायली ने सीमा क्षेत्र में चालक रहित विमानों (ड्रॉन) के हमलों के संबंध में आवश्यक सूचनाएं देकर विदेशी संचालकों का भरोसा जीत लिया था। बाद में उसने आत्मघाती हमला किया। यह कबायली डबल एजेंट हो सकता है।

उन्होंने जोर दिया कि उनकी सूचना अपुष्ट है लेकिन संकेत दिया कि इसके पीछे अफगान तालिबानियों का हाथ हो सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रतीकात्मक और रणनीतिक रूप से यह हमला एक बड़ा धक्का है। इससे क्षेत्र में वर्षो से जमे हुए सीआईए अधिकारियों की संख्या घट सकती है, जिनकी आने वाले समय में जरूरत होगी। इसके साथ ही सीआईए के अड्डे जैसे कठिन ठिकानों को भी निशाना बनाने की तालिबान की क्षमता भी प्रदर्शित हुई।

संयुक्त राष्ट्र के अल कायदा और तालिबान निगरानी दल के समन्वयक रिचर्ड बैरेट ने सीएनएन से कहा कि सीआईए अधिकारियों की हत्या का दावा कर सकने वाले किसी भी आतंकवादी गुट को बहुत लाभ होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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