रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट देश की एकता के लिए खतरा : राजनाथ

सोमवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत में राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल ही में संसद के पटल पर रखी गई रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट में धर्म के आधार पर आरक्षण देने की संस्तुति की गई है, जो संविधान विरोधी है। इस रिपोर्ट को रद्द कर दिया जाना चाहिए क्योंकि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है।

पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यह रिपोर्ट देश की एकता, अखंडता और सार्वभौमिकता के लिए खतरा बन गई है। यह रिपोर्ट अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के अधिकारों के खिलाफ है और इससे धर्मातरण को प्रोत्साहन मिलेगा।

सिंह ने कहा कि गरीबी को जाति और धर्म के आधार पर मापना उचित नहीं है। सरकार द्वारा ऐसा कोई भी कदम उठाया गया तो यह अलगाववाद को बढ़ावा देगा।

उन्होंने कहा कि भाजपा चाहती है कि अल्पसंख्यक के दर्जे को जिला स्तर पर, क्षेत्र स्तर पर, राज्य स्तर पर और राष्ट्रीय स्तर पर पुनर्परिभाषित किया जाए।

सिंह ने कहा कि उत्तर पूर्व में ईसाइयों की आबादी ज्यादा है फिर भी वहां वे अल्पसंख्यक हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए भाजपा की मांग है कि अल्पसंख्यक दर्जे को फिर से परिभाषित किया जाए।

भाजपा के नविनयुक्त अध्यक्ष नितिन गडकरी के बारे में पूछे जाने पर राजनाथ ने कहा कि नितिन बहुत की ऊर्जावान हैं। एक नौजवान को पार्टी का दायित्व सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि जो लोग नितिन को जानते हैं वह उनकी क्षमता से वाकिफ हैं।

गडकरी की तारीफ करते हुए राजनाथ ने कहा कि महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना सरकार में लोक निर्माण मंत्री रहते हुए उन्होंने जो काम किया वह सराहनीय है।

जम्मू एवं कश्मीर को स्वायत्तता देने के मुद्दे पर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को स्वायत्तता देने की बात उचित नहीं है। वहां भी भारत के दूसरे राज्यों की तरह लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार है।

सुरक्षा के मुद्दे पर भी सिंह ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। सरकार पर लापरवाह होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में पाकिस्तान की गतिविधियां जारी होने के बावजूद कट्टरपंथियों के दबाव में वहां से 30,000 सैनिकों को वापस बुला लिया गया। उन्होंने कहा, "मुझे पता चला है कि सेना के वरिष्ठ अधिकारी केंद्र सरकार के इस फैसले से सहमत नहीं थे।"

मंहगाई के मुद्दे पर राजनाथ ने कहा कि सरकार की गलत आर्थिक नीतियों और आर्थिक कुप्रबंधन के कारण आज देश में मंहगाई थमने का नाम नहीं ले रही है। उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि अगर लगातार इसी तरह खाद्य पदार्थो के दाम बढ़ते रहे तो कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का खतरा उत्पन्न हो सकता और भोजन के लिए दंगे तक हो सकते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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