न्यायालय ने रसूखदार लोगों के खिलाफ मामलों का ब्यौरा मांगा
न्यायमूर्ति रणजीत सिंह ने पंजाब, हरियाणा और चण्डीगढ़ के गृह सचिवों से 12 जनवरी तक पुलिस अधिकारियों, राजनेताओं और नौकरशाहों के खिलाफ लंबित मामलों का ब्यौरा देने को कहा है।
न्यायालय ने यह आदेश रुचिका गिरहोत्रा मामले में हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी.एस.राठौड़ को दोषी करार दिए जाने को लेकर दिया है। अपने पद का दुरुपयोग करते हुए राठौड़ 19 वर्षो तक कानून से भागता रहा। केंद्रीय जांच ब्यूरो की विशेष अदालत ने उसे पिछले साल 21 दिसम्बर को दोषी करार दिया था।
सिंह ने पिछले साल 27 दिसम्बर के अपने आदेश में कहा था, "यह 'जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड ' (इंसाफ में देरी, इंसाफ न मिलने के समान है) का ज्वलंत उदाहरण है। इसका दोष अदालतों की न्याय प्रणाली सहित सभी संबद्ध विभागों को बांटना होगा। "
न्यायाधीश ने कहा उच्च पदों पर बैठे रसूखदार लोग अक्सर व्यवस्था को अपने मुताबिक ढालते रहते हैं।
गौरतलब है कि 12 अगस्त 1990 को हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी.एस.राठौड़ ने 14 वर्षीया रुचिका के साथ दुर्व्यवहार किया था और उसके तीन साल बाद रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी।
सीबीआई की विशेष अदालत ने पिछले दिनों रुचिका मामले में राठौड़ को छह महीने की सजा सुनाई थी लेकिन 10 मिनट के भीतर ही उसे जमानत मिल गई भी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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