महाबोधि मंदिर की मुक्ति के लिए बौद्घ भिक्षुओं का आमरण अनशन

महाबोधि मंदिर प्रबंधन अधिनियम 1949 में संशोधन की मांग को लेकर अनशन पर बैठे बौद्घ भिक्षुओं ने बिहार सरकार से इस संबंध में आठ दिनों के अंदर एक प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजने की मांग की है।

महाबोधि मंदिर कार्यकारिणी समिति के कार्यालय के समीप अनशन पर बैठे छह बौद्घ भिक्षुओं का नेतृत्व कर रहे 'प्रियदर्शी अशोक महान बौद्घ विहार केसरिया' के भंते बुद्घ शरण ने शनिवार को बताया कि उनकी आठ सूत्री मांगों में महाबोधि मंदिर की मुक्ति की मांग प्रमुख है।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा उनकी आठ सूत्री मांग में 500 बौद्घ भिक्षुओं के रहने और ध्यान साधना हेतु धर्मशाला का निर्माण, महाबोधि मंदिर में श्राद्घ और पिण्डदान पर रोक लगाने, मंदिर समिति में देश व प्रदेश के योग्य बौद्ध भिक्षुओं को सेवा का मौका देने सहित अन्य मांगे शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आमरण अनशन पर बैठे बौद्घ भिक्षुओं की संख्या में और वृद्घि होगी।

इसके पहले लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान ने भी महाबोधि मंदिर को बौद्घ धर्म संप्रदाय के लोगों को सौंपने की मांग की थी।

पटना से लगभग 110 किलोमीटर दूर स्थित बोध गया में ही महाबोधि वृक्ष के नीचे महात्मा बुद्घ को ज्ञान प्राप्त होने की बात प्रचलित है। लगभाग 1500 वर्ष पूर्व बनाए गए महाबोधि मंदिर को बौद्घ संप्रदाय के लोगों को सौंपने की मांग अब उठने लगी है।

वर्तमान नियमों के अनुसार महाबोधि मंदिर प्रबंधन समिति का अध्यक्ष गया जिले का जिलाधिकारी होता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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