कराची में मुहर्रम जुलूस में विस्फोट, 30 मरे

यह वारदात सिंध प्रांत की राजधानी कराची के मुख्य मार्ग एमए जिन्ना रोड पर उस समय हुई जब हजारों की तादाद में शिया मुसलमान मातम करते हुए जुलूस में शामिल थे। उसी वक्त हमलावर ने जुलूस की आगे की पंक्ति के पास विस्फोट को अंजाम दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावर जुलूस में लोगों की भीड़ के बीच कूद गया। यह धमाका जामिया कपड़ा बाजार के नजदीक डेंसो हॉल में यौमे आशुरा के वक्त हुआ। विस्फोट के बाद भगदड़ मच गई। सिंध प्रांत के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी हाशिम रजा जैदी ने कहा कि विस्फोट में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई और 80 अन्य घायल हो गए।
विस्फोट के बाद दंगा
हमले के बाद शहर में दंगा भड़क गया है और भीड़ ने 400 दुकानों और करीब 68 वाहनों में आग लगा दी। घटनास्थल पर खून-खून ही बिखरा था। जुलूस के आगे चल रही एंबुलेंस और पुलिस की गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हो गईं।
सिंध प्रांत के स्वास्थ्य मंत्री सगीर अहमद के मुताबिक मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि घायलों में कई की हालत गंभीर है। कराची के महापौर मुस्तफा कमाल ने कहा कि शिया और सुन्नी संप्रदाय में तनाव बढ़ाने और शहर की शांति भंग करने के लिए इस हमले को अंजाम दिया गया।
तालिबान का हाथ हो सकता है
अभी तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री रहमान मलिक ने कहा कि देश को अस्थिर करने के लिए तालिबान, अल कायदा और सुन्नी आतंकवादी समूह ने त्रिकोणीय गठजोड़ बना लिया है।
मलिक ने विस्फोट के बाद हुई हिंसा की तीव्र भर्त्सना करते हुए कहा कि अर्धसैनिक बलों ने हालात पर काबू पा लिया है। प्रशासन ने शहर में मुहर्रम के जुलूस की सुरक्षा के लिए 10 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया था। उसके बावजूद इस हमले को अंजाम दिया गया।
शिया मुसलमान सन 680 में इमाम हुसैन के दिए गए बलिदान को याद करते हुए यह पर्व मनाते हैं। इससे पहले सोमवार को ही आतंकियों ने मुजफ्फराबाद में भी एक मुहर्रम जुलूस में आत्मघाती हमला किया, जिसमें 15 लोग मारे गए और पचास से ज्यादा घायल हुए।












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