रुचिका मामले में न्याय की मांग हुई तेज, गृह मंत्रालय ने नोटिस भेजा (लीड-1)
गृह सचिव जी.के.पिल्लई ने कहा, "मंत्रालय पूर्व पुलिस महानिदेशक से वर्ष 1985 में दिए गए पुलिस मेडल वापस लेने के लिए कदम बढ़ा रहा है। इस मसले को संबद्ध समिति को भेजा जाएगा और बाद में इसे राष्ट्रपति को भेज दिया जाएगा।" उन्होंने कहा कि राठौर को दी जाने वाली पेंशन की जांच की जा रही है।
उधर, हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा है कि बहुचर्चित रुचिका गिरहोत्रा मामले की फिर से जांच की जाएगी। हुड्डा ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, "मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि हम इस मामले की फिर जांच करेंगे। पीड़िता परिवार के प्रति मेरी पूरी सहानुभूति है।"
हुड्डा ने कहा, "मैं पहले ही राज्य के पुलिस महानिदेशक से रुचिका के परिवार को पूरी सुरक्षा देने के लिए कह चुका हूं।" इससे पहले मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता वृंदा करात ने हुड्डा से मिलकर इस मामले के दोषी एस.पी.सी. राठौर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की।
चण्डीगढ़ में पीड़ित पक्ष के वकील पंकज भारद्वाज ने शनिवार को रुचिका की चिकित्सकीय रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसमें कई विसंगतियां थीं। पिछले 13 वर्षो से इस मामले की निशुल्क पैरवी करने वाले भारद्वाज ने आईएएनएस से कहा, "हमें चिकित्सकीय रिपोर्ट में कई गंभीर विसंगतियां मिली, जिन्होंने मामले की सुनवाई में अहम भूमिका निभाई। रुचिका की आत्महत्या के बाद पुलिस को जो रिपोर्ट सौंपी गई उसमें कहा गया था कि उसने अधिक मात्रा में पतले होने की दवा का निर्धारित मात्रा से अधिक सेवन कर लिया था।"
रुचिका की चिकित्सकीय रिपोर्ट पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) ने तैयार की थी।
भारद्वाज ने कहा, "ऐसा कम ही होता है कि किसी की मौत पतले होने वाली दवा के सेवन करने से हो जाए। विभिन्न चिकित्सकीय औपचारिकताओं और कानूनी जटिलताओं से बचने और मामले को रफादफा करने के लिए यह कारण दिया गया था।"
रुचिका की दोस्त आराधना के पिता आनंद प्रकाश ने शनिवार को आईएएनएस से कहा, "हालांकि ऐसे अपराध में छह महीने की सजा कुछ भी नहीं है लेकिन फिर भी हम संतुष्ट हैं कि अदालत ने राठौर को दोषी माना। अब हम चाहते हैं कि संबद्ध विभाग राठौर से उसको अबतक मिले सभी सम्मान छीन लें।"
रुचिका और उसके परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रकाश और उनकी पत्नी मधु गत 19 वर्षो से लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रकाश ने कहा, "राठौर राज्य सरकार के संरक्षण के कारण 19 साल तक बचता रहा। इस वजह से रुचिका के परिजनों को न्याय मिलने में देरी हुई, इसके लिए हमारी सरकार भी जिम्मेदार है।"
प्रकाश ने कहा, "राज्य सरकार द्वारा रुचिका के परिजनों को वित्तीय मुआवजा दिलाने के लिए हम अदालत में याचिका दायर करेंगे। हमारे वकील सभी तथ्यों का मूल्यांकन कर रहे हैं और हम जल्द ही याचिका दायर करेंगे।"
रुचिका के भाई आशु को भी पुलिस प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा था। प्रकाश ने कहा, "हम पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में रुचिका मामले को फिर से खोलने और राठौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाने के लिए याचिका दायर करेंगे।"
प्रकाश ने कहा, "मैं पहले अकेले था इसलिए राठौर अपनी इच्छा से हेरफेर करता था लेकिन आज मुझे पूरे समाज का समर्थन प्राप्त है। हमें भरोसा है कि अदालत उसके अपराध के अनुरूप उसे सजा जरूर देगी।"
गौरतलब है कि 12 अगस्त 1990 को राठौर ने 14 वर्षीया रुचिका के साथ दुर्व्यवहार किया था और इसके तीन साल बाद रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले की एकमात्र गवाह आराधना ही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने सोमवार को इस मामले में राठौर को छह महीने की सजा सुनाई थी लेकिन 10 मिनट के भीतर ही उसे जमानत पर रिहा कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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