रुचिका मामले में न्याय के लिए मानव श्रृंखला
रुचिका मामले की एकमात्र गवाह आराधना ने इस मानव श्रृंखला का नेतृत्व किया। गैर सरकारी संगठन मानवाधिकार मामलों के नागरिक मंच (सीएफएचआर) के कार्यकर्ताओं ने रुचिका मामले के दोषी और हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी.एस.राठौर के खिलाफ नारेबाजी की।
मानव श्रृंखला में शामिल लोगों ने रुचिका मामले को फिर से खोलने की मांग की। सीएफएचआर के राष्ट्रीय सचिव सुशील गुप्ता ने आईएएनएस से कहा, "कुछ प्रभावशाली लोगों ने न्याय व्यवस्था, पुलिस और राजनीति व्यवस्था को मजाक बना दिया है। एक लोकतांत्रिक देश में इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा और हम देश के अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।"
गुप्ता ने कहा, "हम चाहते हैं कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय रुचिका मामले को फिर से खोले और हम पीड़िता के परिवार के लिए वित्तीय मुआवजे की मांग करेंगे।"
गौरतलब है कि 12 अगस्त 1990 को राठौर ने 14 वर्षीया रुचिका के साथ दुर्व्यवहार किया था और इसके तीन साल बाद रुचिका ने आत्महत्या कर ली थी। इस मामले की एकमात्र गवाह आराधना ही हैं।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने बीते सोमवार को इस मामले में राठौर को छह महीने की सजा सुनाई थी और उस पर 1000 रुपये जुर्माना भी लगाया था लेकिन 10 मिनट के भीतर ही उसे जमानत पर रिहा कर दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications