खराब साल के बाद रियल्टी फर्मो को वर्ष 2010 से उम्मीद

कृष्णा मुखर्जी

नई दिल्ली, 26 दिसम्बर (आईएएनएस)। वर्ष 2008 के मध्य तक लगातार पांच वर्ष की तेजी के बाद 14 अरब डॉलर मूल्य के भारतीय रियल्टी उद्योग को इस वर्ष भारी संकट झेलना पड़ा। इसका कारण केवल मांग में आई तेज गिरावट ही नहीं वरन निर्माण परियोजनाओं के कर्ज पर ऊंची ब्याज भी है।

पिछले वर्षो के दौरान आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं की कीमतों में तीन-चार गुना वृद्धि से प्रसन्न रियल्टी उद्योग अब कम कीमतों की परियोजनाओं को आरंभ करने और कीमतें घटाने पर मजबूत है।

यहां तक कि डीएलएफ और यूनिटेक जैसे बड़े खिलाड़ियों ने भी अपने पुराने कर्जो को खत्म करने और नई परियोजनाओं को आरंभ करने के लिए नकदी जुटाने के लिए क्वोलिफाईड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) के सहारे कोष जुटाया है।

रियल स्टेट डेवलपर बीपीटीपी ने वर्ष 2008 में 5,006 करोड़ रुपये वाले देश के सबसे बड़े भूमि सौदे के तहत हासिल भूमि का भुगतान नहीं कर पाने की स्थिति में जमीन वापस लौटा दी।

पाश्र्वनाथ डेवलपर्स के अध्यक्ष प्रदीप जैन ने आईएएनएस से कहा कि यह साल रियल्टी क्षेत्र के लिए काफी कठिन रहा। इसका मुख्य कारण वैश्विक मंदी है लेकिन मजबूत आधार ने इससे उबरने में मदद की।

ब्रोकरेज और रिसर्च फर्म एसएमसी कैपिटल के अनुसार डीएलएफ, यूनिटेक और इंडियाबुल्स ने वर्ष 2009 के मध्य तक निजी निवेश के माध्यम से 10,300 करोड़ रुपये की रकम जुटाई।

इसके अलावा एम्मार एमजीएफ, लोढ़ा डेवलपर्स और शर्मा प्राइम सिटी जैसी करीब 15 कंपनियां आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के माध्यम से 15,000 करोड़ रुपये उगाहने की तैयारी में हैं।

एम्मार एमजीएफ ने 3,850 करोड़ रुपये, सहारा ने 3,450 करोड़ रुपये, लोढ़ा डेवलपर्स ने 3,000 करोड़ रुपये और गोदरेज प्रोपर्टीज ने बाजार से 600 करोड़ रुपये उगाहने का लक्ष्य रखा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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