नेपाल के दागी जनरल की पदोन्नति पर चिंतित है संयुक्त राष्ट्र

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस अधिकारी और अन्य लोगों की पदोन्नती तब तक नहीं हो सकती जब तक कि उन पर लगे आरोपों की एक पारदर्शी और निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती है।

'ऑफिस ऑफ द यूएन हाई कमीश्नर फॉर ह्युमन राइट्स-नेपाल' (ओएचसीएचआर-नेपाल) के प्रमुख रिचर्ड बैनेट ने एक वक्तव्य जारी कर मेजर जनरल तोरान बहादुर सिंह की भारी विरोध के बावजूद लेफ्टिनेंट जनरल और नेपाली सेना के सेकंड-इन-कमांड के रूप में पदोन्नति किए जाने के प्रति चिंता व्यक्त की है।

संयुक्त राष्ट्र अधिकारी ने कहा, "ओएचसीएचआर की रुख 2006 से वही है। 10वीं ब्रिगेड के वे सदस्य जिन पर 2003 और 2004 में जनरल सिंह के कार्यकाल में मानवाधिकारों के हनन का आरोप है, उन्हें उनके खिलाफ लंबित मामलों की पूरी, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होने तक पदोन्नत नहीं किया जाना चाहिए।"

मानवाधिकार संगठनों के विरोध के बावजूद नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार ने गुरुवार को सिंह की पदोन्नति करने का फैसला लिया है। माओवादियों के विद्रोह के दौरान सिंह के यातना शिविर में सैनिकों ने कई लोगों को माओवादी छापामारों की मदद करने के संदेह में रखकर प्रताड़ित किया था।

तीन साल बाद ओएचसीएचआर की एक जांच में खुलासा हुआ था कि यह यातना शिविर राजधानी के केंद्र में चलता था, जहां लोगों को माओवादी होने या उनसे सहानुभूति रखने के संदेह में कैद रखा जाता था और उन्हें बुरी तरह से प्रताड़ित किया जाता था।

करीब 50 कैदियों का अब भी कुछ पता नहीं चला है और ऐसा माना जा रहा है कि सेना ने उन्हें मारकर सामूहिक कब्रों में दफना दिया था।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार एजेंसी का कहना है कि यद्यपि सिंह प्रताड़ता और हत्याओं से सीधे तौर पर नहीं जुड़े थे तब भी चूंकि वह इस ब्रिगेड के प्रमुख थे इसलिए वह इस कृत्य के लिए जिम्मेदार हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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