जलवायु समझौता गरीब देशों के साथ धोखा

केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री जयराम रमेश ने मंगलवार को राज्यसभा में कोपेनहेगन सम्मेलन के नतीजे पर बयान दिया। इस बयान के संदर्भो का हवाला देते हुए जेटली सरकार पर जमकर बरसे।
भाजपा नेता ने कहा कि सरकार 'शर्म-अल शेख सिंड्रोम' की चपेट में है और कोपेनहेगन समझौते को देखकर भी यही लगता है। उन्होंने कहा कि समझौता कुछ कहता है और इसपर सरकार की समझ कुछ और है।
जेटली ने इस समझौते को 'अमेरिका-बेसिक' समझौता करार दिया। उल्लेखनीय है कि 'बेसिक' देशों में ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत और चीन शामिल हैं।
उन्होंने कहा, "यह समझौता पूरी तरह से गरीब देशों के साथ विश्वासघात के रूप में प्रतीत होता है।" जेटली ने कहा कि सरकार इस समझौते के दिशा-निर्देशों के भावी नतीजों को स्पष्ट करे।
इससे पहले रमेश ने कहा कि कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन में भारत ने न सिर्फ अपने हितों की रक्षा की बल्कि इसे आगे भी बढ़ाया। उन्होंने कहा कि इस समझौते से राष्ट्रीय संप्रभुता को कोई ठेस नहीं पहुंची है।
उन्होंने दोहराया कि सम्मेलन के दौरान विकसित और विकासशील देशों के बीच हुआ समझौता कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस समझौते को लेकर सभी प्रमुख राष्ट्रों ने अपनी सहमति जताई है। रमेश ने कहा कि सम्मेलन दौरान 'बेसिक' देशों के बीच नजदीकी तालमेल होना भी एक उपलब्धि रही।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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