संस्कृत विद्यापीठ के कुलपति को मिला चौथा सेवा विस्तार
नई दिल्ली, 20 दिसम्बर (आईएएनएस)। देश में संस्कृत भाषा की प्रमुख शैक्षणिक संस्थान लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ के कुलपति को लगातार चौथी बार सेवा विस्तार मिला है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पिछले महीने विद्यापीठ के कुलपति वाचस्पति उपाध्याय के कार्यकाल को बढ़ाने का फैसला किया था।
उपाध्याय ने आईएएनएस से कहा कि उन्होंने वर्ष 1994 में कुलपति का पदभार ग्रहण किया था। उन्होंने कहा कि अब वह वर्ष 2014 तक कुलपति बने रहेंगे।
सेवा विस्तार के मंत्रालय के फैसले के बाद संभवत: उपाध्याय देश में सबसे अधिक समय तक अपने पद पर बने रहने वाले कुलपति बन गए हैं। दूसरी ओर उनके आलोचक मंत्रालय के फैसले का विरोध कर रहे हैं।
उपाध्याय ने कहा, "मैं एक सरकारी सेवक हूं और सेवा विस्तार का फैसला सरकार ने लिया है। एक कुलपति का कार्यकाल एक ही बार रखने संबंधी मसौदे को अभी मंजूरी नहीं मिली है।"
उपाध्याय ने कहा, "मेरी नियुक्ति खोज एवं चयन समिति ने की है। कुलपति की नियुक्ति को कैबिनेट की एक समिति मंजूरी देती है। कोई इसे कैसे चुनौती दे सकता है?"
उपाध्याय को चौथी बार सेवा विस्तार दिए जाने का विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि इस फैसले उन्हें चोट पहुंची है। विद्यापीठ के एक प्रोफेसर ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया, "एक कुलपति पांच वर्ष तक पद पर बना रहता है। कभी-कभी उसे दूसरा कार्यकाल भी दिया जाता है लेकिन उपाध्याय गत 15 सालों से इस पद पर हैं और अब उन्हें फिर से विस्तार दिया गया है।"
एक अन्य प्रोफेसर ने कहा कि विद्यापीठ के कर्मचारी संघ भी उपाध्याय से खुश नहीं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि उपाध्याय ने कानून की अनदेखी कर शिक्षकों की बहाली की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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