कोपेनहेगन समझौता अंतत: पारित (राउंडअप)
कोपेनहेगन, 19 दिसम्बर (आईएएनएस)। दो दिनों तक चली कठोर सौदेबाजी और पर्दे के पीछे की मंत्रणाओं के बाद अंतत: शनिवार को संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में कोपेनहेगन समझौता पारित हो गया। राहत महसूस कर रहे संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान की मून ने कहा कि अब भारत और चार अन्य देशों द्वारा तैयार समझौता लागू होगा।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के अनुसार समझौते के चार प्रमुख तत्व हैं-लंबे समय में वैश्विक तापमान वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस के भीतर रखना, वातावरण को गर्म कर रही ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती की सभी देशों की प्रतिबद्धता, वनों की कटाई को रोकना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में गरीब देशों की मदद के लिए कोष जुटाना।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आरंभिक कदम उठाने के बारे में हुए पहले समझौते का अभी भी हालांकि चार देश विरोध कर रहे हैं।
तुवालू और सूडान ने कहा कि यह बहुत कमजोर है वहीं वेनेजुएला और बोलीविया इस बात को लेकर नाराज हैं कि जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र प्रारूप संधि (यूएनएफसीसीसी) में शामिल सभी 192 देशों ने इस पर चर्चा नहीं की।
गतिरोध को समाप्त होने में सात घंटे लगे और अंतिम सत्र को तीन बार स्थगति किया गया जो पहले ही तय समय से 12 घंटे विलंब से शनिवार को सुबह तीन बजे बुलाया गया।
परंतु अंतिम सत्र के तीसरे स्थगन के बाद बैठक आंरभ होने के 30 सेकेंड के भीतर ही अध्यक्ष ने कहा कि सम्मेलन ने कोपेनहेगन समझौते को स्वीकार कर लिया है। अंतिम सत्र में शामिल आश्चर्यचकित प्रतिनिधियों को कुछ समझ में नहीं आया। परंतु जैसे ही उनकी समझ में आया कि क्या हुआ है, सभी ने अपने स्थान पर खड़े होकर देर तक खुलकर इसकी प्रशंसा की।
अध्यक्ष ने समझौते का विरोध करने वाले देशों को केवल यह छूट दी कि समझौते को मंजूरी देने वाले देशों के नाम ही शीर्षक पेज पर दर्ज किए जाएंगे।
इससे राहत महसूस कर रहे संयुक्त राष्ट्र महासचिव सम्मेलन हाल से बाहर आए और पत्रकारों से कहा, "अंतत: हमने समझौते पर मुहर लगा दी।"
समझौते के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की चीन, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं से हुई वार्ता का उल्लेख करते हुए मून ने कहा कि पिछले दो दिन बहुत बड़े और रोचक थे।
पिछले दो दिनों से होटल के अपने कमरे में वापस नहीं लौटे और केवल दो घंटे सोये मून ने कहा, "दुनिया के नेताओं को वार्ता की मेज पर लाना फलदायक रहा। उन्होंने वह नहीं दिया जिसकी हर किसी को उम्मीद थी लेकिन वह किया जो आवश्यक है।"
मून ने कहा कि समझौते में अगले तीन वर्षो तक गरीब देशों के लिए हर साल 10 अरब डॉलर की रकम जुटाना और उसके बाद हर साल सभी स्रोतों से 100 अरब डॉलर जुटाने का अमेरिकी वादा शामिल है।
उन्होंने कहा कि समझौते में विकासशील देशों द्वारा ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने के लिए उठाए गए कदमों की पारदर्शिता शामिल है।
मून ने कहा कि कोपेनहेगन समझौता हरित विकास के नए युग का आरंभ होगा।
उन्होंने कहा कि अगला कदम कानूनी रूप से बाध्यकारी एक संधि तैयार करना और कोष एकत्र करना है।
मून ने कहा कि यह एक राजनीतिक समझौता है लेकिन तुरंत प्रभावी है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि 10 अरब डॉलर का कोष अगले महीने तक तैयार हो जाएगा। समझौते में कहा गया कि विकसित देशों को एक फरवरी 2010 तक उत्सर्जन कटौती के अपने कदमों के बारे में रिपोर्ट देनी चाहिए। भारत और चीन जैसे बड़े विकासशील देशों को भी अपने उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों की जानकारी इसी तिथि तक देनी होगी।
मून ने कोपेनहेगन समझौते को कानूनी रूप से बाध्य संधि में बदलने की समयसीमा नहीं बताई लेकिन कहा कि वह अगले वर्ष तक इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पूरा प्रयास करेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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