भारत व ब्रिटेन के बीच हो सकता है असैन्य परमाणु समझौता
नई दिल्ली, 18 दिसम्बर (आईएएनएस)। ब्रिटिश व्यापार मंत्री पीटर मेंडलसन के छह दिवसीय भारत दौरे के दौरान भारत और ब्रिटेन के बीच असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। मेंडलसन का दौरा शुक्रवार से शुरू हो रहा है।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि परमाणु ऊर्जा विभाग ने इस विषय पर एक टिप्पणी तैयार कर ली है। दरअसल, परमाणु ऊर्जा विभाग को प्रधानमंत्री कार्यालय से सूचित किया गया था कि समझौते का मसौदा लगभग एक महीना पहले ही तैयार कर लिया जाना चाहिए।
भारत की ओर से समझौते पर बातचीत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम. के. नारायणन द्वारा आयोजित की गई थी।
पीटर मेंडलसन ब्रिटिश सरकार में नंबर दो का स्थान रखते हैं। वह व्यापार, नवाचार एवं कौशल मामलों के विदेश मंत्री हैं। वह शुक्रवार को बेंगलुरू पहुंचे हैं। वह अपने छह दिवसीय दौरे के दौरान देश के दो शहरों का दौरा करेंगे। वह शनिवार को नई दिल्ली पहुंचेंगे। नई दिल्ली में वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्रियों से मुलाकात करेंगे।
यह समझौता दोनों देशों के बीच आशय के एक घोषणा पत्र के रूप में होगा।
यदि मेंडलसन के इस दौरे के दौरान यह समझौता होता है तो अक्टूबर 2008 में अमेरिका के साथ ऐतिहासिक परमाणु समझौते के बाद भारत द्वारा किया जाने वाला यह सातवां असैन्य परमाणु समझौता होगा। अमेरिका के साथ हुए समझौते के बाद से फ्रांस, रूस, मंगोलिया, कजाकस्तान, अर्जेटिना और नामीबिया के साथ भारत ने असैन्य परमाणु क्षेत्र में सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
भारत कनाडा के साथ पहले ही एक असैन्य परमाणु सहयोग समझौते को अंतिम रूप दे चुका है। इस पर अगले वर्ष तक हस्ताक्षर होने की संभावना है।
वर्ष 2005 में भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान जारी होने के बाद से ब्रिटेन अंतर्राष्ट्रीय परमाणु व्यापार में भारत के पुन:प्रवेश का प्रबल समर्थक रहा है।
अधिकारियों ने कहा है कि वे चाहते थे कि इस समझौते पर हस्ताक्षर भारतीय और ब्रिटिश प्रधानमंत्री की उपस्थिति में हो, लेकिन अगले कुछ महीनों के दौरान इस तरह के उच्चस्तरीय दौरे की संभावना नहीं है। चूंकि ब्रिटिश प्रधानमंत्री गार्डन ब्राउन जनवरी 2008 में भारत आ चुके हैं, लिहाजा अब मनमोहन सिंह के लंदन जाने की बारी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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