प्रधानमंत्री कोपेनहेगन रवाना, कहा कि गरीबी से समझौता नहीं होगा (लीड-2)

विमान में कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण प्रधानमंत्री की रवानगी निर्धारित समय पर नहीं हो सकी। उन्हें दोपहर 2.45 बजे रवाना होना था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह 'सकारात्मक विचार विमर्श' की ओर देख रहे हैं लेकिन उन्होंने जोर दिया कि विकसित देशों को किसी भी समझौते से गरीब देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर से संबंधित चिंताओं को दूर करने की जरूरत है।

रवानगी से पहले जारी बयान में मनमोहन सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत प्रतिबद्ध है, जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कुछ ज्यादा करने का इच्छुक भी है लेकिन विकासशील देशों में बरकरार गरीबी की कीमत पर इस वैश्विक समस्या से नहीं निपटा जा सकता।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के एक जिम्मेदार सदस्य के रूप में भारत पर्यावरण के संरक्षण और हिफाजत के लिए शेष विश्व के साथ मिलकर काम करने को पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, "इस सिद्धांत के आधार पर मैंने हेलीगेंडम में वर्ष 2007 में कहा था कि भारत प्रति व्यक्ति औसत कार्बन उत्सर्जन विकसित देशों में प्रति व्यक्ति औसत कार्बन उत्सर्जन की तुलना में कम रखेगा।"

सिंह ने कहा, "पर्यावरण हमारी सामूहिक धरोहर है, जिसे अपनी भावी पीढ़ियों के लिए हमें विरासत में छोड़ना है। इसके साथ ही विकासशील देशों में बरकरार गरीबी की कीमत पर जलवायु परिवर्तन की समस्या से नहीं निपटा का जा सकता।"

उन्होंने कहा कि विश्व के तापमान में वृद्धि का सबसे ज्यादा प्रभाव भारत जैसे विकासशील देशों पर पड़ रहा है और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के एक जिम्मेदार सदस्य के रूप में भारत पर्यावरण के संरक्षण के लिए अत्यधिक कदम उठाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं कोपेनहेगन में रचनात्मक विचार-विमर्श का उत्सुक हूं जिसमें सभी लोगों की सामूहिक भावनाएं शामिल हो सकें और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के वैश्विक प्रयासों की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।"

प्रधानमंत्री के दो दिवसीय कोपेनहगन दौरे पर उनके साथ विदेश सचिव निरुपमा राव, जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री के विशेष दूत श्याम सरन और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी होंगे। पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश पहले से ही कोपेनहेगन में मौजूद हैं।

इस बीच डेनमार्क द्वारा अपने 'राजनीतिक घोषणा पत्र' पर जोर दिए जाने के कारण सम्मेलन में गतिरोध पैदा हो गया है।

पर्यावरण मंत्री मंत्री जयराम रमेश ने कहा, "अब दोषारोपण का सिलसिला शुरू हो जाएगा, लेकिन विकासशील देशों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।"

डेनमार्क के प्रधानमंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने विकासशील देशों के किसी भी पर्यावरण मंत्री को राजनीतिक घोषणापत्र का मसौदा दिखाने से इंकार कर दिया। वह इस घोषणापत्र का मसौदा गुरुवार शाम को शासनाध्यक्षों की बैठक में पेश करने वाले हैं।

सम्मेलन में वार्ताकार क्योटो संधि और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए दीर्घकालिक सहयोग के अग्रिम समझौतों पर काम कर रहे थे। गतिरोध का असर इस वार्ता पर भी पड़ेगा।

रमेश ने कहा, "हमने कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन को सफल बनाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन इसकी प्रक्रिया बहुत दोषपूर्ण रही। डेनमार्क की सरकार ने गंभीर प्रयास नहीं किए।"

रमेश ने कहा, "हमने डेनमार्क सरकार से बार-बार मसौदा दिखाने का अनुरोध किया। उन्होंने हर बार हमें उसे दिखाने का वादा किया, लेकिन वादा पूरा नहीं किया। हमने भरोसा करके काम किया, लेकिन उन्होंने जानबूझकर विलंब किया क्योंकि वे इसे सीधे राष्ट्राध्यक्षों के समक्ष ही पेश करना चाहते हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

*

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+