सिंगूर में रेलवे के प्रस्ताव का स्वागत, पर संशय बरकरार
सिंगूर (पश्चिम बंगाल), 16 दिसम्बर (आईएएनएस)। सिंगूर के किसान महादेब दास की 12 बीघा जमीन टाटा मोटर्स की नैनो परियोजना के लिए राज्य की वाम सरकार ने 2006 में अधिग्रहित कर ली थी। दास ने अपनी खुशी से अपनी जमीन नहीं दी थी।
नाराज दास ने मुआवजा राशि लेने से इंकार कर दिया था और विपक्षी तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में अपनी जमीन वापस लेने के किसानों के आंदोलन में शामिल हो गए थे।
सरकार द्वारा 997.11 एकड़ जमीन पर रेल मंत्रालय के एक रेल कोच कारखाने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद हुगली जिले का सिंगूर पर एक बार फिर सभी की निगाहों में है।
इस परियोजना को लेकर यहां के निवासी और स्थानीय हितधारक संदेह और उत्साह दोनों स्थितियों में हैं।
आशंकित दास कहते हैं, "हम अब तक नहीं जानते कि क्या होने जा रहा है। क्या रेल कोच फैक्टरी यहां लगने से हमें हमारी जमीन वापस मिल जाएगी। क्या इससे हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए नौकरियां सुनिश्चित होंगी।"
जमीन अधिग्रहण के विरोध में आंदोलन चला रहीं ममता बनर्जी, 'दीदी' के रेल मंत्री होने से यहां के लोग कुछ आशान्वित हैं।
दास ने आईएएनएस से कहा, "अब, चूंकि दीदी ने इस राष्ट्रीय परियोजना का प्रस्ताव रखा है इसलिए मैं अपनी कुछ जमीन दे सकता हूं, लेकिन पूरी 12 बीघा जमीन नहीं।"
किसानों द्वारा किए गए हिंसक आंदोलन के बाद पिछले साल टाटा मोटर्स को गुजरात जाना पड़ा था। इसके बाद राज्य सरकार का यहां वाहन निर्माता कंपनी 'फर्स्ट ऑटोमोबाइल' और विद्युत उपकरण निर्माता कंपनी 'भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स' को स्थापित करने का प्रयास असफल रहा। लेकिन राज्य सरकार ने हाल ही में रेल मंत्रालय के समक्ष एक रेल कोच कारखाना स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है।
नैनो परियोजना के लिए अपनी एक बीघा जमीन दे चुके कुशल साहा कहते हैं, "मुझे पूरी प्रक्रिया रहस्मय लगती है। मुझे नहीं लगता कि हममें से एक भी इस मुद्दे पर स्पष्ट विचार रखता है।"
साहा ने आईएएनएस से कहा, "दोनों पार्टियां, राज्य सरकार और विपक्ष एक खेल खेल रहे हैं और हम राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में फंस गए हैं।"
यद्यपि नैनो परियोजना के विरोध से जुड़े रहे बेचाराम मन्ना को विश्वास है कि रेल परियोजना में 600 एकड़ भूमि ही ली जाएगी और शेष 400 एकड़ जमीन जिसे किसान वापस लेना चाहते हैं, वह किसानों को वापस कर दी जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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