शिक्षा के क्षेत्र में इस वर्ष विवाद और सुधार साथ-साथ चले (लेखा-जोखा 2009)
नई दिल्ली, 16 दिसम्बर (आईएएनएस)। यह वर्ष शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और विवादों के लिए चर्चित रहा। शिक्षा का अधिकार कानून से लेकर आईआईटी और आईआईएम संस्थानों में शिक्षकों के लिए छूट संबंधी विवादास्पद मुद्दे ही पूरे देश में मुख्य रूप से छाए रहे। आईएएनएस ने वर्ष भर में शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रमुख घटनाओं का लेखा जोखा तैयार किया है:
बजट में बढ़ोतरी:
संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के सत्ता में आने के बाद केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि सामाजिक क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और यूपीए ने अपने बजट में उसे प्रदर्शित भी किया था। यूपीए सरकार ने शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में इस साल 20 फीसदी अधिक खर्च करने की घोषणा की।
शिक्षा के क्षेत्र का आधार मजबूत करने के लिए सरकार ने 445 अरब रुपए आवंटित किए, जबकि स्कूली शिक्षा के लिए 290.9 अरब और उच्च शिक्षा के लिए 154.29 अरब राशि का आवंटन किया गया।
शिक्षा का अधिकार :
बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा विधेयक को कानून का रूप दिया गया। इस ऐतिहासिक कानून के बारे में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने इसे देश में शिक्षा के परिदृश्य को बदलने के लिए एक सकारात्मक निर्णय के रूप में बताया।
विधेयक के संसद में पास होने के बाद छह वर्ष से 14 वर्ष के सभी बच्चों के लिए शिक्षा को अनिवार्य कर दिया गया। कपिल सिब्बल ने कहा, "देश में पहली बार शिक्षा को सर्वव्यापी बनाने का प्रयास किया गया है।"
नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अलावा राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के साथ ही स्कूलों को बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने के लिए तीन साल का समय दिया गया है। स्कूलों में शैक्षिक रूप से वंचित बच्चों और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के साथ ही पिछड़े वर्गो के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में 25 फीसदी आरक्षण की बात कही गई।
सीबीएसई कक्षा 10 की परीक्षा का उन्मूलन:
शिक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा लिए गए एक महत्पूर्ण फैसले ने देश भर के छात्रों को खुश होने का मौका दे दिया। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की अगले शैक्षणिक सत्र 2010-11 से कक्षा 10 की परीक्षा को समाप्त करने की घोषणा की।
देश में विदेशी विश्वविद्यालयों की अनुमति का प्रस्ताव :
केंद्र सरकार देश में विदेशी विश्वविद्यालयों और विदेशी शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश की अनुमति के लिए आम सहमति बनाने का प्रयास कर रही है। इस संबंध में विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय विदेशी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थाओं को आरक्षण के लिए दबाव डाले बिना अनुमति देने की इच्छुक है।
केंद्रीय विश्वविद्यालय:
दो साल की बातचीत के बाद संसद और कैबिनेट में नए केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की मंजूरी प्रदान की गई। इस प्रस्ताव के तहत देश भर में 16 नए केंद्रीय विश्वविद्यालय खोले जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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