शोधकर्ताओं ने शीजोफ्रेनिया से जुड़े जीन की पहचान की

'एबीसीए 13' नाम का यह जीन मस्तिष्क के 'हिप्पोकैम्पस' (मस्तिष्क का वह हिस्सा जहां सूचना, याददाश्त में बदलती है) और 'कॉरटैक्स' (मस्तिष्क की सबसे बाहरी परत) में सक्रिय होता है, लेकिन मानसिक बीमारी से इसका कोई संबंध नहीं है।

शीजोफ्रेनिया एक प्रकार का मानसिक विकार है, जिसके लक्षणों में रोगी की सोच, भावनाएं और व्यवहार बुरी तरह से प्रभावित होते हैं। द्विध्रवी विकार व्यक्ति के स्वभाव में विकृति से संबंधित है, इसकी वजह से व्यक्ति में भावनात्मक परिवर्तन होते हैं।

आस्ट्रेलिया के 'क्वींसलैंड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडीकल रिसर्च' (क्यूआईएमआर) के एलन मैकरे का कहना है कि यह खोज बहुत महत्वपूर्ण है।

मैकरे का कहना है, "हमने शीजोफ्रेनिया पीड़ित एक मरीज का आनुवांशिक विश्लेषण किया, जिसमें देखा गया कि इस व्यक्ति का डीएनए एक जगह से, 'एबीसीए 13' जीन के ठीक बीच से टूटा हुआ है। इसका मतलब है कि यह जीन ठीक से काम नहीं करेगा। इसलिए हमने यह अवधारणा दी कि हो सकता कि इस बीमारी की वजह यही हो।"

शोधकर्ताओं ने 3,000 लोगों पर यह अध्ययन किया और बीमारी से ग्रस्त लोगों और स्वस्थ लोगों में जीन की स्थिति की तुलना की।

क्यूआईएमआर की विज्ञप्ति में कहा गया है कि शोधकर्ताओं ने पाया कि 'एबीसीए 13' जीन, शीजोफ्रेनिया और द्विध्रुवीय विकार से जुड़ा हुआ है।

इस अध्ययन के परिणाम अमेरिकी पत्रिका ह्यूमन जेनिटिक्स में प्रकाशित हुए हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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