पृथक तेलंगाना की कहानी बयां करता ब्लॉग जगत
नई दिल्ली, 13 दिसम्बर (आईएएनएस)। महात्मा गांधी ने यह मार्ग दिखाया था, 'भूख हड़ताल करो और सरकार को झुकाओ।' तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव गांधीजी के आदर्शो को कितना मानते हैं यह तो वे ही जानें लेकिन उनकी भूख हड़ताल पृथक तेलंगाना के स्वप्न को साकार करती दिख रही है। तेलंगाना से संबंधित ऐसी ही कई टिप्पणियों से इन दिनों ब्लॉग जगत गुलजार है।
'तरकश डॉट कॉम' ने 'तेलंगाना की कहानी, संघर्ष, सपना और नई मांगें' शीर्षक से टिप्पणी की है, जिसमें कहा गया है, "तेलंगाना को लेकर गतिरोध समाप्त नहीं हुआ है बल्कि बढ़ गया है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि कांग्रेस ने एक बड़ी भूल कर दी है। कांग्रेस ने समय खरीदने के लिए तेलंगाना को मंजूरी दी लेकिन इससे आंदोलन कम नहीं और तेज हो गया।"
'आम्रपाली' ने टिप्पणी की है, "तेलंगाना को केंद्र की स्वीकृति ने छोटे राज्यों के पैरोकारों में एक नया उत्साह भरा है। पूरे देश से इस तरह की मांग उठ रही है, जिनमें से कई तो बहुत पुरानी है या फिर जिनका कुछ आधार भी बनता है। कुछ लोगों द्वारा इसका विरोध इस अंदाज में किया जाता है मानो छोटे भौगोलिक-सांस्कृतिक या क्षेत्रीय अभिव्यक्तियों को बोलने का हक ही नहीं है। ये विरोध कई बार सामंती अंदाज ले लेता है मानो वे शासक हों और मांग करने वाला शासित।"
'संवेदना' ने 'तेलंगाना को जानो' शीर्षक से आंध्र प्रदेश के इस क्षेत्र के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। ब्लॉग ने टिप्पणी की है, "पिछले कुछ दिनों से पृथक तेलंगाना को लेकर पूरे देश में जबरदस्त हलचल मची हुई है। आंध्र जल रहा है तो राजनीतिक हलके भी सुलग रहे हैं। कहीं हां तो कहीं ना का शोर कानों को परेशान कर रहा है। इसी परेशानी के बीच ये जानने की इच्छा जोर मारने लगती है कि आखिर तेलंगाना है क्या?"
केंद्र सरकार की पृथक तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा का असर पूर्वोत्तर राज्यों पर भी पड़ा है। यहां भी कई छोटे-छोटे राज्यों की मांग तेज हो गई है। विभिन्न ब्लॉग इस मुद्दे पर भी टिप्पणी कर रहे हैं।
'आधार' ने टिप्पणी की है कि पूर्वोत्तर में सक्रिय अलगाववादी गुट तेलंगाना के बहाने अपनी राजनीति करने लगे हैं। पृथक राज्य के नाम पर वे लोगों की भावनाओं को अपने पक्ष में करना चाहते हैं और अपनी रोटी सेंकना चाहते हैं।
तेलंगाना और अन्य छोटे राज्यों के गठन की मांग के मुद्दे पर ब्लॉग की दुनिया में इन दिनों ऐसी सैंकड़ों टिप्पणियां पढ़ने को मिल रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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